चुनावी तर्क वितर्क के पहले एपिसोड में जानें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर क्या हैं विशेषज्ञों के विचार

उत्तर प्रदेश के चुनाव पर पूरे देश की नजर

उत्तर प्रदेश का चुनाव केंद्र की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में हो रहे इस चुनाव पर पूरे देश की नजर है। 5 चरणों के मतदान के बाद राजनीतिक विशेषज्ञ इस चुनाव को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनावों में 5 चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। इसके छठें चरण का मतदान 3 मार्च व सातवें चरण का मतदान 7 मार्च को होना तय हुआ है। उत्तर प्रदेश में हो रहे इस चुनाव पर पूरे देश की नजर है। 5 चरणों के मतदान के बाद राजनीतिक विशेषज्ञ इस चुनाव को समझने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में अबतक के मतदान के बाद जनता का मूड समझना व आने वाले चरणों के चुनावों के लिए आवश्यक मुद्दों के विश्लेषण के लिए Koo Studio के खास प्रोग्राम चुनावी तर्क वितर्क के पहले एपिसोड का आयोजन किया गया। जिसमें चुनाव के हर मुद्दे पर राजनीतिक विशेषज्ञों की गहरी चर्चा व सटीक विश्लेषण किया गया।

इसके पहले एपिसोड में Dr. Suvrokamal Dutta प्रमुख मेहमान थे, जो कि मीडिया विचारक, राजनीतिक विशेषज्ञ व विदेश नीति के विशेषज्ञ हैं। साथ ही Jagran New Media के एग्जक्यूटिव एडिटर व राजनीतिक विशेषज्ञ Pratyush Ranjan भी इस शो का हिस्सा था। चुनावी तर्क वितर्क के इस एपिसोड में उत्तर प्रदेश की राजनीति के विभिन्न आयामों को बेहतर तरीके से समझा गया।

उत्तर प्रदेश चुनाव में जिन मुद्दों को जनता ने सबसे ज्यादा महत्व दिया वो हैं कोविड 19 महामारी के दौरान व्यवस्था, मुफ्त राशन, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा आदि। इसके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय मुद्दों ने भी उत्तर प्रदेश चुनाव को काफी प्रभावित किया है। इस एपिसोड ने एक्सपर्ट्स ने बताया कि उत्तर प्रदेश का चुनाव मुख्यरूप में भारतीय जनता पार्टी व समाजवादी पार्टी के बीच ही रहा है। बाकि अन्य पार्टियां इस चुनाव में स्थानीय स्तर पर अपनी छाप नहीं छोड़ पाई हैं।

उत्तर प्रदेश का चुनाव केंद्र की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरता है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश के चुनाव पर पूरे देश की नजर रहती है। अभी तक के हुए मतदान पर बात करते हुए एक्सपर्ट ने बताया कि मतदान का प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले कम रहा है। मतदान का प्रतिशत कम रहना जनता की उदासीनता को दर्शाता है। साथ ही पूरे कार्यकाल के दौरान विपक्षी दलों की उदासीनता के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। जो कि जनता के सामने एक सशक्त विकल्प न दे पाने का प्रमुख कारण है।

सरकार के रिपोर्ट पर जनता की प्रतिक्रिया की बात करते हुए एक्सपर्ट ने बताया कि आम लोगों के मन में इसको लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया मिली। कहीं पर बहुत ज्यादा विरोध नहीं दिखाई दिया। हालांकि किसान आंदोलन आदि कई मुद्दों का शुरूआत में प्रभाव था लेकिन इन्होंने ने भी खास छाप छोड़ने में सफलता प्राप्त नहीं की है।

इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश चुनाव के और भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसे आप यहां पर देख सकते ह

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