विधानसभा में भाजपा पर बरसे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, पढ़िए द कश्मीर फाइल्स की कमाई पर क्या बोले?

 

बोले-फिल्म से कमाए 200 करोड़ कश्मीरी पंडितों के वेलफेयर पर किए जाएं खर्च।

कश्मीर में आतंकी घटनाओं में बड़ी संख्या में दलित भी मारे गए लेकिन उनकी चर्चा तक नहीं हो रही है। कश्मीरी पंडितों को राजनीति के लिए इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्यों में हुए दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि 2018 से अब तक देश में 2920 दंगे हुए हैं।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर मची खींचतान के बीच उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में भाग लेते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों के नाम पर राजनीति की रोटी सेंकने वाली भाजपा 'द कश्मीर फाइल्स' पर तो बहुत चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन जब दिल्ली विधानसभा में कश्मीरी पंडितों के वेलफेयर की बात आई तो सदन से उठकर भाग गई।

उन्होंने कहा कि यह भाजपा का दोहरा चरित्र है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा केवल 'द कश्मीर फाइल्स' की बात करती है और हम कश्मीरी पंडितों के वेलफेयर की बात करते हैं। केंद्र में बैठी भाजपा सरकार, कश्मीरी पंडितों पर झूठी राजनीति करने के बजाय उनकी बेहतरी के लिए तीन मांगों को पूरा करे। केंद्र सरकर विस्थापितों का पुनर्वास करे, फिल्म से कमाए 200 करोड़ रुपये कश्मीरी पंडितों के वेलफेयर के लिए खर्च करे और पूरा देश कश्मीरी पंडितों के दुख -दर्द से वाकिफ हो सके, इसलिए फिल्म को यू-ट्यूब पर डालें।

इसके साथ ही सत्तापक्ष ने सदन में 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर लाए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। भाजपा पर यह बहुत बड़ा सवाल है कि 32 साल बाद भी कश्मीरी पंडितों को अपने ही देश में विस्थापित होकर क्यों रहना पड़ रहा है? भाजपा हमेशा अपने घोषणा पत्रों में लिखती रही है कि सत्ता में आने के बाद कश्मीरी विस्थापितों की मदद कर उनका पुनर्वास करने का काम करेगी, लेकिन पिछले आठ सालों से केंद्र सरकार में है और कुछ समय से कश्मीर में सरकार में होने के बाद भी भाजपा आज तक यह क्यों नहीं करवा सकी।

केजरीवाल सरकार ने 233 कश्मीरी शिक्षकों को किया नियमित

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कश्मीरी विस्थापित शिक्ष्रक 25 सालों से दिल्ली सरकार के स्कूलों में अनुबंध पर काम करते रहे। इस दौरान दिल्ली में कांग्रेस और भाजपा की सरकारें रही। 1989-90 में उनके साथ जो हुआ, उस पर देश की जिम्मेदारी है कि उनके जख्म को भरे और सीएम अरविंद केजरीवाल ने बिना किसी कागजात के तुरंत 233 कश्मीरी विस्थापित शिक्षकों को परमानेंट करने की व्यवस्था करने के आदेश दिए। साथ ही, आज दिल्ली सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों के परिवारों के प्रत्येक सदस्यों को प्रतिमाह 3250 रुपये देती है।

दलितों की भी बात होनी चाहिए

गौतम मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि केवल कश्मीरी पंडितों की बात हो रही है। दलितों की भी बात होनी चाहिए। भाजपा एवं कांग्रेस शासित राज्यों में खासतौर पर राजस्थान में दलितों के साथ ही कई घटनाएं हुई हैं, लेकिन इन पार्टियों का दलितों के दर्द से कोई लेना देना नहीं है। कश्मीर में आतंकी घटनाओं में बड़ी संख्या में दलित भी मारे गए, लेकिन उनकी चर्चा तक नहीं हो रही है। कश्मीरी पंडितों को राजनीति के लिए इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है। गौतम ने राज्यों में हुए दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि 2018 से अब तक देश में 2920 दंगे हुए हैं। भाजपा सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया।प्रस्ताव पर चर्चा में विधायक सौरभ भारद्वाज, मदनलाल, राजेश गुप्ता, ऋतुराज झा आदि ने भी अपने विचार रखे।