अंतरराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस: सुप्रीम कोर्ट में पहली बार मना समारोह, CJI ने कहा- कानूनी शिक्षा में लड़कियों को मिले आरक्षण

 

CJI ने कहा- कानूनी शिक्षा में लड़कियों को मिले आरक्षण

आंकड़े देखने से पता चलता है कि महिलाओं को जिला स्तर पर न्यायिक अधिकारी नियुक्त करने के उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पैनल एडवोकेट नियुक्त करते समय महिलाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ।

 नई दिल्ली [ ब्यूरो]।  प्रधान न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना ने न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए कानूनी शिक्षा में लड़कियों के आरक्षण का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और राजनीतिक इच्छाशक्ति जुटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस का बहुत महत्व है। महिलाओं को न्यायपालिका में शामिल करने और आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए जस्टिस रमना ने कहा कि प्रतिभा पूल को समृद्ध करने के लिए वे दृढ़ता से कानूनी शिक्षा में लड़कियों के लिए आरक्षण का प्रस्ताव करते हैं।

आंकड़े देखने से पता चलता है कि महिलाओं को जिला स्तर पर न्यायिक अधिकारी नियुक्त करने के उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि पैनल एडवोकेट नियुक्त करते समय महिलाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जस्टिस रमना ने यह बात 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में पहली बार आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस समारोह में कही। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि तेलंगाना में न्यायिक अधिकारियों में 52 प्रतिशत, असम में 46 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 45 प्रतिशत, ओडिशा में 42 प्रतिशत और राजस्थान में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा, 'मैं दृढ़ता के साथ महसूस करता हूं कि महिलाओं को आरक्षण देने की नीति सभी स्तरों और सभी राज्यों में लागू की जानी चाहिए।'

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चार महिला न्यायाधीश हैं। यह अब तक सबसे ज्यादा संख्या है। निकट भविष्य में हम पहली महिला प्रधान न्यायाधीश को भी देखेंगे। लेकिन अब भी हम न्यायपालिका में महिलाओं का 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने से दूर हैं। कानूनी पेशा अब भी पुरुष प्रधान है। यहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। उन्होंने कहा कि वह न्यायिक व्यवस्था में इस असंतुलन को दूर करने के लिए अपने स्तर पर सबसे ज्यादा प्रयास कर रहे हैं। सीजेआइ ने कहा, प्रधान न्यायाधीश का पद ग्रहण करने के बाद मैंने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नौ रिक्तियां भरीं। इसमें तीन महिलाओं को न्यायाधीश बनाया। इसके लिए मैं कोलेजियम के अपने साथी न्यायाधीशों को धन्यवाद देता हूं। जस्टिस रमना ने कहा कि हाई कोर्ट के लिए कोलेजियम ने 192 नामों की संस्तुति की थी, जिनमें 37 महिलाएं थीं। यह निश्चित तौर पर हाई कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी है। लेकिन दुर्भाग्य से 37 में से सिर्फ 17 महिला न्यायाधीशों की ही अब तक नियुक्ति हुई है। बाकी के नाम सरकार के पास लंबित हैं।

समारोह में सुप्रीम कोर्ट की चार महिला न्यायाधीशों-जस्टिस इंदिरा बनर्जी, बीवी नागरत्ना, बेला एम त्रिवेदी और हिमा कोहली ने भी भाग लिया। चारों न्यायाधीशों ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। समारोह आनलाइन आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों की सभी महिला न्यायाधीशों ने हिस्सा लिया।