फार्मा कंपनियों के अनैतिक तरीके नियंत्रित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब, FMRAI की याचिका पर प्रतिक्रिया देने के लिए केंद्र को दिए छह हफ्ते

 

फार्मा कंपनियों पर SC ने केंद्र से मांगा जवाब (फाइल फोटो)

फार्मा कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए फेडरेशन आफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन आफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसपर SC ने छह हफ्तों के वक्त में केंद्र से जवाब मांगा है।

नई दिल्ली, ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने आम जनता को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार का मन बनाया है। एक याचिका दाखिल हुई है जिसमें दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए फार्मा कंपनियों पर मार्केटिंग के अनैतिक तरीके अपनाने और डाक्टरों से गठजोड़ कर उन्हें उपहार और प्रलोभन देने का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मा कंपनियों के मार्केटिंग के अनैतिक तरीकों को नियंत्रित करने के लिए कानून और दिशा निर्देश बनाए जाने की मांग वाली इस याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका फेडरेशन आफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन आफ इंडिया ने दाखिल की है।

फार्मा कंपनियों की जवाबदेही तय करने की कवायद

शुक्रवार को याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारिख और अपर्णा भट ने मामले में बहस करते हुए कहा कि अभी फार्मा कंपनियों के मार्केटिंग और व्यापार के अनैतिक तरीकों को नियंत्रित करने का कोई कानून नहीं है। फार्मास्यूटिकल कंपनियां अपनी दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए डाक्टरों को उपहार और अन्य तरह का प्रलोभन देती हैं जो रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में डाक्टरों की जवाबदेही बनती है और कानून के तहत उन पर कार्रवाई हो सकती है, लेकिन फार्मा कंपनियां छूट जाती हैं। फार्मा कंपनियों के मार्केटिंग के इस अनैतिक तरीके और डाक्टरों को उपहार देकर प्रलोभित करने पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाए। पारिख की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि वह मामले में नोटिस जारी कर रहे हैं जिसका सरकार को छह सप्ताह में जवाब देना है। देखते हैं सरकार इस मामले में क्या कहती है।

यूनीफार्म कोड तैयार करने के निर्देश देने की मांग

याचिका में मांग की गई है कि फार्मा कंपनियों के व्यापार के अनैतिक व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए फार्मा मार्केटिंग प्रैक्टिस के यूनीफार्म कोड तैयार करने के निर्देश दिए जाएं। कानून में मार्केटिंग के अनैतिक तौर-तरीकों पर अंकुश लगाने का पारदर्शी जवाबदेह तंत्र बनाया जाए, उसकी निगरानी हो और उल्लंघन के परिणाम हों। जब तक कानून बनता है तब तक उसे नियंत्रित और नियमित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट दिशानिर्देश जारी करे।

चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के आरोप

याचिका में जीवन और स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार की दुहाई देते हुए कहा गया है कि फार्मास्यूटिकल कंपनियां अपनी दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स से गठजोड़ करती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स (डाक्टर) महंगी दवाइयों को बढ़ावा देने के लिए मरीजों को ज्यादा और गैरजरूरी दवाएं लिखते हैं। ये स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है जो जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा हैं, ऐसे भ्रष्टाचार के कई उदाहरण हैं।