यूक्रेन की मदद को आगे आया IAEA, शीघ्र तकनीकी सहयोग देने को है तैयार

 

यूक्रेन की मदद को आगे आया IAEA, शीघ्र तकनीकी सहयोग देने को है तैयार

यूक्रेन के परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने व इसमें होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के मद्देनजर आइएइए ने कीव को तकनीकी सहयोग प्रदान करने की इच्छा जताई है। डायरेक्टर जनरल ग्रोसी के यूक्रेन दौरे का मकसद ही यहां की परमाणु सुविधाओं को सुरक्षा प्रदान करना है।

कीव, एएनआइ। Russia Ukraine Conflict: रूस और यूक्रेन के बीच जारी भारी संघर्ष के बीच इंटरनेशनल एटामिक एनर्जी एजेंसी के डायरेक्टर-जनरल राफेल मारियानो ग्रासी (Rafael Mariano Grossi) यूक्रेन दौरे पर गए ताकि शीघ्र तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा सकें। इससे देश के परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही उन दुर्घटनाओं को रोका जा सके जिससे पर्यावरण व लोगों के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है। डायरेक्टर जनरल के दौरे का मकसद ही यूक्रेन की परमाणु सुविधाओं को सुरक्षा प्रदान करना है।

IAEA के डायरेक्टर जनरल ने यह भी कहा कि खार्कीव परमाणु अनुसंधान सुविधा में परमाणु सामग्री की थोड़ी मात्रा गोलीबारी के बावजूद बरकरार रही। इसी माह की शुरुआत में इंटरनेशनल एटामिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने बताया था कि डायरेक्टर जनरल की ओर से संकेत दिया गया कि चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट में इंस्टाल किए गए सेफगार्ड मानिटरिंग सिस्टम से ट्रांसमिशन डेटा नहीं मिलने से यह साबित हो गया कि वहां से संपर्क टूट गया है।' बता दें कि यह सेफगार्ड सिस्टम न्यूक्लियर मटीरियल को ट्रैक करने के लिए लगाया जाता है। 

यूक्रेन ने IAEA को सूचित किया था कि चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट में 21 मार्च के बाद से टेक्निकल स्टाफ में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। यह बात UN न्यूक्लियर वाचडाग ने स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को दी थी। डायरेक्टर जनरल ग्रासी ने बताया कि यूक्रेन को भी यह नहीं पता कि अगला रोटेशन कब होगा। IAEA द्वारा दिए गए तकनीकी सहयोग से IAEA को भी फायदा होगा और यह यूक्रेन में सुरक्षा गतिविधियों को बढ़ा सकेगा।

दुनिया के सभी न्‍यूक्लियर पावर प्‍लांट की निगरानी इंटरनेशनल एटोमिक एनर्जी एजेंसी करती है। न्‍यूक्लियर प्‍लांट पर किसी बड़े हमले के नतीजे भयावह हो सकते हैं। 80 के दशक में चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में जो हादसा हुआ था उसकी वजह टेस्टिंग के दौरान वहां प्‍लांट का अस्थिर होना और तापमान का अत्‍यधिक बढ़ जाना था। इस धमाके में चेर्नोबिल प्‍लांट की छत भी उड़ गई थी। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा खतरा रेडिएशन के बढ़ने का होता है। धमाके के बाद निकलने वाला कचरा लोगों की जान ले सकता है।