इमरान पर सेना से रार पड़ी भारी, सत्ता में बने रहने के लिए जिस ISI का किया इस्तेमाल अब वही खुफ‍िया एजेंसी उन्‍हें हटाने में जुटी

 

इमरान खान की सत्‍ता से विदाई तय मानी जा रही है। (File Photo)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Prime Minister of Pakistan Imran Khan) ने सत्‍ता में बने रहने के लिए जिस आइएसआइ का इस्‍तेमाल किया अब उसी खुफिया एजेंसी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पढ़ें यह रिपोर्ट. ...

नई दिल्‍ली, एएनआइ। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Prime Minister of Pakistan Imran Khan) की सत्‍ता से विदाई तय मानी जा रही है। उनके ताजा बयान उनकी हताशा दिखा रहे हैं। 20 मार्च को खैबर पख्तूनख्वा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए इमरान ने भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा था कि हमारे पड़ोसी देश की नीति लोगों की भलाई के लिए है। ऐसा लगता है कि उन्हें एक असफल सरकार का नेतृत्‍व करने और सत्‍ता से विदाई का एहसास हो गया है।समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक हुकूमत से इमरान खान के संभावित निष्कासन से एक बार फिर यह स्थापित हो जाएगा कि पाकिस्‍तान में लोकतंत्र जीवित रह ही नहीं सकता है। पिछले तमाम सियासी घटनाक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्‍तान एक ऐसा मुल्‍क है जहां सेना और उसकी शक्तिशाली खुफि‍या शाखा इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस यानी आइएसआइ सत्‍ता से सियासत तक सब कुछ नियंत्रित करती है।

पाकिस्तान में किसी भी सियासी दल को सत्ता में बने रहने के लिए शक्तिशाली सेना का समर्थन पाना बेहद महत्वपूर्ण है। इमरान खान ने यही बात समझने में चूक कर दी और पूर्व के हुक्‍मरानों की तरह ही सेना को अपमानित करने का बड़ा अपराध कर दिया। इमरान खान ने सत्ता में बने रहने के लिए जिस आईएसआई का इस्तेमाल किया। अब वही आईएसआई उन्‍हें सत्ता से हटाने की कोशिश कर रही है।

दरअसल पाकिस्‍तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा आईएसआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद को पेशावर स्थित ग्यारहवीं कोर के कमांडर के रूप में स्थानांतरित करने की योजना बना रहे थे और उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम को डीजी आईएसआई के रूप में बैठाने की योजना बना रहे थे। सेना में इसे रूटीन ट्रांसफर के तौर पर जो देखा जा रहा था लेकिन इमरान खान इसमें आड़े आ गए थे।

प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसके लिए औपचारिक अधिसूचना जारी करने से इनकार कर दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक इमरान खान जनरल फैज हामिद पर बहुत अधिक निर्भर हो गए थे। इमरान अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए आईएसआई का इस्तेमाल कर रहे थे। सेना प्रमुख बाजवा को यह बात रास नहीं आई और उन्‍होंने जनरल नदीम अंजुम को डीजी आईएसआई बना दिया जिस फैसले पर ना-नुकुर करते इमरान को भी मुहर लगानी पड़ी। यही नहीं इमरान को सेना प्रमुख बदलने को लेकर भी चेतावनी दी गई।