मुलायम सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में 22 मई को होगी सुनवाई

 

आय से अधिक संपत्ति मामले में फिर बढ़ सकती मुलायम सिंह यादव की मुश्किल, दिल्ली में होगी अहम सुनवाई

SP Leader Mulayam Singh Yadav आय से अधिक संपत्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सपा के पूर्व प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर चल रहे मामले पर याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने फिर राऊज एवेन्य कोर्ट में याचिका लगाई है।

नई दिल्ली,  संवाददाता। आय से अधिक संपत्ति मामले में घिरे समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की आने वाले दिनों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस मामले में  दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) शपथपत्र दाखिल कर कोर्ट को स्वत: दर्ज की गई एफआइआर पर अपना रुख स्पष्ट करेगी। इस मामले में अब 22 मई को सुनवाई होगी, दरअसल, आय से अधिक संपत्ति के मामलों को सुप्रीम कोर्ट में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर चल रहे मामले पर एक याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने दिल्ली की राऊज एवेन्य कोर्ट में याचिका लगाई है।  याचिका में कहा गया है कि फर्जी हलफनामे के मामले में कोई क्लोजर रिपोर्ट सीबीआइ ने दाखिल नहीं की है।

बता दें कि आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में मुलायम सिंह यादव ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की रिपोर्ट के खिलाफ राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई थी। पिछले सुनवाई में महानगर दंडाधिकारी अंबिका सिंह की अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए सीबीआइ से अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया था। एडवोकेट विश्वनाथ चतुर्वेदी ने साल 2012 में सीबीआइ द्वारा दाखिल की गई जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इस मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई की मांग की थी।

जिला जज सुधीर कुमार जैन की अदालत ने याचिका ठुकराते हुए कहा था कि यदि संबंधित अदालत को लगता है कि यह मामला किसी एमपी या एमएलए से जुड़ा है तो वह उसे स्थानांतरित कर सकता है। इसके बाद ही महानगर दंडाधिकारी अंबिका सिंह की अदालत में इस संबंध में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई थी। मामले में सुनवाई करते हुए दंडाधिकारी ने सीबीआइ को निर्देशित किया कि जांच रिपोर्ट के समय क्या संभावित आरोपित मुलायम सिंह यादव एमपी या एमएलए थे।

सीबीआइ रिपोर्ट के बाद ही कोर्ट इस मामले को एमपी एमएलए कोर्ट को स्थानांतरित करने का निर्णय लेगी। याचिकाकर्ता ने मामले में वर्ष 2012 को दाखिल की गई सीबीआई रिपोर्ट पर संज्ञान लेने का भी अनुरोध किया है। सभी पक्षों को सुनने और रिपोर्ट के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में इस याचिका को ही खारिज कर दिया।