बेहद खास है पंजाब के गुरदासपुर की केंद्रीय जेल में 311 साल पुराना कुआं, बाबा बंदा सिंह बहादुर ने यहां बनवाया था किला

 

केंद्रीय जेल गुरदासपुर में 311 साल पुराना कुआं मिला है।

केंद्रीय जेल गुरदासपुर में 311 साल पुराना कुआं मिला है। यह कुआं बाबा बंदा सिंह बहादुर के समय का है। जेल प्रशासन ने अब इसे संरक्षित करने का फैसला किया है। इस कुएं के कारण पूरी जेल को भी नया रूप दिया जा रहा है।

गुरदासपुर : केंद्रीय जेल गुरदासपुर में 311 साल पुराना कुआं मिला है। सरकारी रिकार्ड व माहिर इतिहासकारों के मुताबिक दस फीट गहरा यह कुआं 1711 में बाबा बंदा सिंह बहादुर के समय का है। जेल के नवीनीकरण के लिए की जा रही खुदाई के दौरान जेल अधिकारियों को इस कुएं का पता चला।

इसके बाद इतिहासकारों व सरकारी रिकार्ड मंगवाया गया, तो पता चला कि पहले केंद्रीय जेल एक किला होती थी और इस कुएं के पास ही सिख शूरवीरों के घोड़ों को बांधा जाता था। बाद में किले के जेल बनने के बाद कुएं की चारदीवारी कर आसपास कैदियों के लिए बैरक बना दिए गए।

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जेल में कुएं के इतिहास को बताती प्लेट लगाई गई है।

जेल प्रशासन ने अब इसे संरक्षित करने का फैसला किया है। खास बात है कि इस कुएं के कारण पूरी जेल को भी नया रूप दिया जा रहा है। कुएं के पास एक स्टील की प्लेट लगाई गई है, जिस पर जेल व कुएं का इतिहास लिखा गया है। जेल की बाकी दीवारों पर भी गुरु नानक देव जी, बंदा सिंह बहादुर व मुगल शासकों की पेंटिंग बनाई जा रही है, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर के बारे में दुनिया को बताया जा सके।

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जेल में बनाई जा रही पेटिंग।

जेल का इतिहास

'इबरतनामा' के लेखक मिर्जा मोहम्मद हरीसी व डाक्टर हरि राम गुप्ता के मुताबिक 1711 में बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरदासपुर आए थे। यहीं पर उन्होंने इस किले का निर्माण करवाया था। 1848-49 में सिखों व अंग्रेजों के युद्ध में अंग्रेजों ने किले पर कब्जा कर लिया था। 1852 में इसे गुरदासपुर का जिला हेडक्वार्टर घोषित कर दिया था।

जेल के रिकार्ड व जिला गजटियर के मुताबिक 1854-55 में यह किला खंडहर में तब्दील हो गया था, जिसको मुगल बादशाह बहादुर शाह ने तबाह कर दिया था। यहां ईटों से दोबारा जेल बनाई गई। जेल के अंदर एक वर्कशाप का निर्माण करने के दौरान इस कुएं को बंद कर दिया गया था। कुएं के आसपास नानकशाही समय में प्रयोग की गई ईटें भी मिली हैं।

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'' कोटबंदा सिंह बहादुर भारत के मुगल शासकों के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले पहले सिख सैन्य प्रमुख थे। उनकी तरफ से बनवाए गए किले व कुएं का इतने सालों बाद मिलना बड़ी बात है। जेल के अंदर कुएं के पास एक बड़ी प्लेट लगाई गई है। इसे संरक्षित किया जा रहा है। पूरी जेल को नया स्वरूप दिया जा रहा है।