इमरान खान ने कार्यवाहक पीएम के रूप में पूर्व मुख्‍य न्‍याधीश गुलजार अहमद का किया प्रस्‍ताव, विपक्ष को बताया भ्रष्‍ट

 

पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री इमरान खान। (फाइल फोटो)

रेडियो पाकिस्तान के अनुसार इमरान खान ने पूर्व मुख्‍य न्‍याधीश गुलजार अहमद को कार्यवाहक प्रधान मंत्री के रूप में प्रस्तावित किया है। इमरान खान ने कहा कि उनके शासन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक भ्रष्टाचार के मामले हुए। वे अरबों रुपये विदेश भेजना चाहते हैं।

इस्लामाबाद, एएनआई। पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार को कहा कि विपक्ष अपनी भ्रष्ट प्रथाओं को खत्‍म करने के लिए राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश दो लाने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि वे अब तक अपांयर को अपने पक्ष में मैच जीतते रहे हैं। वहीं रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, इमरान खान ने पूर्व मुख्‍य न्‍याधीश गुलजार अहमद को कार्यवाहक प्रधान मंत्री के रूप में प्रस्तावित किया है।इमरान खान ने कहा कि उनके शासन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक भ्रष्टाचार के मामले हुए। वे अरबों रुपये विदेश भेजना चाहते हैं। वे अपना साम्राज्य बनाना चाहते हैं। वे चुनाव आयोग के साथ हस्तक्षेप करना चाहते हैं। उन्होंने केवल अंपायर को अपने पक्ष में करके मैच जीतते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष पिछले 3.5 साल से सत्ता में बदलाव की मांग कर रहा है। अब जब मैंने जल्दी चुनाव कराने का आह्वान किया है तो वे सुप्रीम कोर्ट जाना चाहते हैं।

उन्‍होंने कहा कि वे कहते रहे हैं कि मेरा शासन खराब था। वे कहते थे कि लोग हम पर अंडे फेंकेंगे। वे कहते थे कि हमने देश को नष्ट कर दिया। उन्होंने पीएम में बदलाव की मांग की और चुनाव का आह्वान किया। इमरान खान ने जल्द चुनाव के आह्वान पर विपक्ष के हालिया विरोध पर पलटवार करते हुए कहा कि अब सवाल यह है कि अगर वे यही चाहते थे तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रास्ता क्यों अपनाया। वे चुनाव के लिए कहते थे तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रास्ता क्यों चुना?

उन्होंने विपक्ष पर सवाल किया तो बेहतर क्या है? लोगों की पसंद से शासन करना या विदेशी साजिश से सत्‍ता में आना। पीएम ने दोहराया कि विपक्ष भ्रष्‍ट है। उन्होंने 20-25 करोड़ में अपना विवेक बेच दिया है।

राष्ट्रपति द्वारा नेशनल असेंबली को भंग करने के बाद सुप्रीम कोर्ट बार अहसान भून ने मुख्‍य न्‍यायधीश को स्थिति का नोटिस लेने और असंवैधानिक कदम को शून्य घोषित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा भंग करने का कोई संवैधानिक औचित्य नहीं है। पाकिस्‍तान में भारी राजनीतिक नाटक के बीच सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा नेशनल असेंबली को भंग करने का स्वत: संज्ञान लिया है।