हाईकोर्ट ने प्रशांत भूषण के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही पर लगाई रोक

 

बीसीडी ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।

भूषण ने उक्त कार्रवाई के खिलाफ अपील याचिका दायर कर इसे रद करने की मांग की है।उन्होंने दलील दी कि मामला इस अदालत में लंबित होने के बावजूद भी बीसीडी ने कल उनके खिलाफ कार्यवाही की और आदेश सुरक्षित रखा गया।

नई दिल्ली,  संवाददाता। पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के मानकों के उल्लंघन के लिए अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही में आदेश पारित करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। प्रशांस भूषण की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने बार काउंसिल आफ दिल्ली (बीसीडी) को निर्देश दिया।

बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा बनाए गए अधिवक्ता अधिनियम-1961 की धारा 49 (1) (सी) के तहत बनाए गए नियम के तहत एक अधिवक्ता को जनहित के उन मामले में पेश होने से रोका जा सकता सकता है, जिसका वह एक पदाधिकारी या इसकी कार्यकारी समिति का सदस्य हो।भूषण तीन गैर सरकारी संगठनों, सेंटर फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआइएल), स्वराज अभियान और कामन काज के वकील के रूप में पेश हुए थे।इसके बाद बीसीडी ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।

भूषण ने उक्त कार्रवाई के खिलाफ अपील याचिका दायर कर इसे रद करने की मांग की है।उन्होंने दलील दी कि मामला इस अदालत में लंबित होने के बावजूद भी बीसीडी ने कल उनके खिलाफ कार्यवाही की और आदेश सुरक्षित रखा गया। वहीं, बीसीडी ने दलील दी कि उसकी कार्यवाही पर कोई रोक नहीं है।इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि जब मामला अदालत के समक्ष सूचीबद्ध है तो बीसीडी की कार्यवाही का क्या मतलब था?

पीठ ने उक्त टिप्पणी करते हुए भूषण के खिलाफ 29 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगा दी। भूषण ने दलील दी कि बीसीडी के समक्ष कहा है कि नियम-आठ का उस मामले पर लागू नहीं होता, जब एक अधिवक्ता बिना शुल्क या लाभ के एक गैर-लाभकारी संगठन की कार्यकारी समिति में हो और उसकी तरफ से पेश हो।