भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी बोले- कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास से पहले एक लाख पूर्व सैनिकों को सपरिवार बसाना जरूरी

 

सुब्रमण्यम स्वामी कश्मीर में जेके पीस फोरम द्वारा आयोजित नवरेह मिलन कार्यक्रम में भाग लेते हुए।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डा सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कोई सैनिक कालोनी नहीं चाहिए। इन लोगों को हर जिले और शहर में रहने के लिए घर दिया जाए ताकि जब कश्मीरी पंडित कयश्मीर आएं तो वह खुद को असुरक्षित महसूस न करें।

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डा सुब्रमण्यम स्वामी ने शनिवार को कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास से पूर्व एक लाख पूर्व सैनिकों को सपरिवार बसाए जाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों केा हर शहर और जिले में बसाया जाना चाहिए ताकि यह कश्मीरी लौटने वाले कश्मीरी पंडितों की रक्षा कर सकें। कश्मीरी पंडितों का नरसंहार दोबारा न हो।

जेके पीस फोरम द्वारा आयोजित नवरेह मिलन कार्यक्रम में भाग लेने आए डा सुब्रमण्यम स्वामी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों की कश्मीर में वापसी के लिए पहले पूरी तरह व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की वापसी से पूर्व करीब एक लाख पूर्व सैनिकों केा सपरिवार कश्मीर में बसाया जाए। हमारे देश में बहुत से सैनिक 45 साल की उम्र मे सेवानिवृत्त होते हैं। उन्हें पांच साल के लिए कश्मीर में बसाया जाए ताकि जब कश्यमीरी पंडित आएं तो उनकी रक्षा के लिए यह एक विशेष बल की तरह काम करे। ठीक वैसे ही जैसे प्रधानमंत्री व अन्य मत्वपूर्ण लाेगों की सुरक्षा के लिए ब्लैक कैट, एसपीजी और एसएसजी होती है।

उन्होंने कहा कि कोई सैनिक कालोनी नहीं चाहिए। इन लोगों को हर जिले और शहर में रहने के लिए घर दिया जाए ताकि जब कश्मीरी पंडित कयश्मीर आएं तो वह खुद को असुरक्षित महसूस न करें। कश्मीरी पंडितों और कश्मीर बसाए गए पूर्व सैनिकों के बीच संपर्क के लिए विशेष टेलीफ़ोन लाईन होनी चाहिए ताकि जब कश्मीरी पंडित खुद को असुरक्षित महसूस करें तो यह उनकी मदद के लिए तुरंत पहुंच सके।

वादी लौटने के इच्छुक कश्मीरी पंडितों की संख्या से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे नहीं मालूम कि कितने लोग वापस आएंगे। बहुत से लोग विदेश जाकर बसे हैं, उनमें से कुछ रिटायर होने के बाद कश्मीर में जिंदगी बसर करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि जरुरी नहीं है कि कश्मीरी पंडितों अलग कालोनी में रहें, जिसकी मर्जी जहां है, वह वहां आकर रहे। अगर कोई खुद को मुस्लिमों के बीच सुरक्षित महसूस नहीं करता तो वे किसी सुरक्षित जगह पर ही जाकर रहना चाहेगा। उन्होंने कहा कि आम लोगों को एक-दूसरे से कोई डर नहीं है। हिंदु-मुस्लिम मतभेद की बात नहीं हैं, यहां हमारे कई सहयोगी मुस्लिम ही हें। उन्हें मुझसे और मुझे उनसे कोई डर नहीं है।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों का नरसंहार हुआ है और उनका दोबारा नरसंहार न हो,यह जरुरी है। इसके लिए सभी व्यवस्थाएं होनी चाहिए। द कश्मीर फाइल्स फिल्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने यह फिल्म नहीं देखी। मुझसे किसी ने इसके बारे में पूछा तो मैने कहा कि मैं अच्छी तरह जानता हूं कि कश्मीरी पंडितों का नरसंहार कैसे हुआ है, उन्हें किस तरह से भगाया गया है।