चुनावी राज्यों में कांग्रेस नेताओं को 'टटोलने' की आप की सक्रियता से सतर्क हुई पार्टी, राज्यों के प्रभारियों से संवाद बढ़ाने की सलाह

 

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की फाइल फोटो

आप संयोजक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ शनिवार-रविवार की गई गुजरात यात्रा हो या फिर भारतीय ट्राइबल पार्टी से आप के गठबंधन की चर्चाएं इन सियासी हलचलों ने भी कांग्रेस को सतर्क किया है।

 ब्यूरो, नई दिल्ली। पांच राज्यों की ताजा चुनावी हार की चुनौतियों से रूबरू हो रही कांग्रेस को छत्तीसगढ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के इस खुलासे ने बेहद सतर्क कर दिया है कि आम आदमी पार्टी (आप) ने उनसे संपर्क साधा था। पंजाब की बड़ी जीत के बाद अन्य चुनावी राज्यों में पांव पसारने की आप की शुरू की गई कोशिशों के बीच सिंह देव के इस खुलासे को कांग्रेस अपने नेताओं को तोड़ने की एक नई सियासी चुनौती के रूप में देख रही है।

इसके मद्देनजर ही पार्टी ने चुनावी राज्यों हिमाचल प्रदेश और गुजरात के साथ ही छत्तीसगढ और राजस्थान जेसे प्रदेश इकाईयों को आप के सियासी जाल फेंकने की कोशिशों को लेकर आगाह कर दिया है। साथ ही इन राज्यों के प्रभारियों को अपने प्रभार वाले सूबों के नेताओं से संवाद बढ़ाते हुए पार्टी की एकजुटता को बाहरी सियासी सेंधमारी से बचाए रखने के लिए निरंतर सजग रहने को भी कहा गया है। चुनावी राज्यों में आप की बढ़ती सक्रियता को कांग्रेस अपने राजनीतिक आधार में सेंध लगाने की बड़ी चुनौती मान रही है और ऐसे में आप उसके नेताओं को तोड़ती है तो यह पार्टी को दोतरफा नुकसान पहुंचाएगा।

कांग्रेस के नेता पार्टी के गिरते ग्राफ को लेकर बदल रहे पाला

बीते सात-आठ सालों के दौरान कांग्रेस के लगातार गिरते सियासी ग्राफ में उसके नेताओं के पाला बदलने या तोड़े जाने की भी बड़ी भूमिका रही है। इस दौरान अब तक भाजपा ने मुख्य रूप से कांग्रेस के प्रभावी नेताओं को पाला बदलने के लिए लुभाया तो कुछ ने अपने साथ हुए सलूक से नाराज होकर न केवल पार्टी छोड़ी बल्कि कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक नुकसान किया।

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराकर भाजपा की सरकार बनवा दी। कर्नाटक में कांग्रेस के दर्जन भर से अधिक विधायकों के पाला बदलने के चलते कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार चली गई। कुछ साल पहले तक कांग्रेस के प्रमुख चेहरा रहे असम में हिमंत विश्वसरमा हो या मणिपुर में बीरेन सिंह आज दोनों भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री हैं।

टीएस सिंह देव के खुलासे के बाद कांग्रेस का सतर्क होना लाजिमी

उत्तर प्रदेश में जितिन प्रसाद से लेकर आरपीएन सिंह ही नहीं दूसरे प्रदेशों में भी कांग्रेस को झटका देने वाले कई ऐसे और उदाहरण हैं। ऐसे में टीएस सिंह देव के खुलासे के बाद कांग्रेस का सतर्क होना लाजिमी है क्योंकि आप जिस राज्य में भी अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ा रही है वहां सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को ही हो रहा है। पंजाब इसका ताजा उदाहरण है जहां आप ने कांग्रेस से सत्ता छीन ली है।

इससे पूर्व राजधानी दिल्ली में आप ने कांग्रेस का सियासी किला ध्वस्त कर दिया था और इसके बाद बीते आठ सालों में पार्टी दिल्ली की राजनीति में तीसरे नंबर से आगे नहीं बढ़ पायी है। अभी गोवा के चुनाव में भी आप की मौजूदगी ने विपक्षी वोटों का बंटवारा किया जिसका नुकसान कांग्रेस को हुआ और सत्ता उससे दूर रह गई।

नेताओं से संवाद बढ़ा कर अंदरूनी मतभेदों को मिटाने की सलाह

पार्टी सूत्रों के अनुसार राज्यों के प्रभारियों को अपने संबंधित सूबों के नेताओं से संवाद बढ़ा कर अंदरूनी मतभेदों को चुनाव से पहले खत्म करने की नेतृत्व की सलाह इसलिए अहम है कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात के आप नेताओं की ओर से कई ऐसे कांग्रेस नेताओं से संपर्क करने की कोशिशें की जा रही है जो किसी न किसी वजह से नाखुश हैं।

आप संयोजक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ शनिवार-रविवार की गई गुजरात यात्रा हो या फिर भारतीय ट्राइबल पार्टी से आप के गठबंधन की चर्चाएं, इन सियासी हलचलों ने भी कांग्रेस को सतर्क किया है। गुजरात के 2017 के चुनाव में कांग्रेस का ट्राइबल पार्टी से गठबंधन था मगर कुछ समय पूर्व बीटीपी ने गठबंधन खत्म कर दिया था। गुजरात चुनाव में आप और बीटीपी का गठबंधन हुआ तो आदिवासी बहुल सीटों पर कांग्रेस को नुकसान होगा जहां उसकी पकड़ अभी भी मजबूत मानी जाती है।