आपकी गाड़ी के धुएं से गर्म हो रहे हैं समुद्र, जानिए कैसे फेल हो रहा धरती को ठंडा रखने का सिस्टम

 

जल्‍द से जल्‍द हमें पृथ्वी की सतह पर बढ़ते ओजोन के स्तर को कम करने के उपाय ढूंढने होंगे।

हमारा वातावरण लगातार बदल रहा है। एक अध्ययन में पाया गया है कि ओजोन परत पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण शीतलन तंत्रों में से एक को कमजोर कर सकता है। वायुमंडल के निचले स्तर पर बढ़ती ओजोन के चलते पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस बन रही है।

नई दिल्ली। आपकी गाड़ियों से निकलने वाला धुआं समुद्र का तापमान बढ़ाने के साथ ही धरती को तेजी से गर्म कर रहा है। जी हां, ये सच है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने अपने अध्ययन में इस बात को साबित किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हवा में बढ़ती ओजोन की मात्रा से समुद्रों का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। इसके चलते आने वाले समय में जलवायु में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं। आपने पढ़ा होगा कि वायुंडल के ऊपर मौजूद ओजोन की परत सूरज से आने वाली खतरनाक किरणों से हमारी रक्षा करती है। लेकिन प्रदूषण के चलते वायुमंडल के निचले स्तर पर बढ़ते ओजोन के स्तर से जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा मिला है।

नेचर क्लाइमेट चेंज शोधपत्र में प्रकाशित एक शोध जिसे वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम और कैलिफोर्निया रिवरसाइड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए किया गया, में दावा किया गया है कि वायुमंडल के निचले स्तर में बढ़ती ओजोन ने विशेष रूप से दक्षिणी महासागर को तेजी से गर्म किया है। अध्ययन से पता चलता है कि वायुमंडल के निचले स्तर पर ओजोन न केवल एक प्रदूषक है, बल्कि जलवायु परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रदूषण से बढ़ा ओजोन

गौरतलब है कि ओजोन ऊपरी वायुमंडल में ऑक्सीजन अणुओं और सूर्य से यूवी विकिरण के बीच परस्पर क्रिया द्वारा निर्मित होता है। निचले वातावरण में, यह वाहनों से निकले अधुं और अन्य उत्सर्जन जैसे प्रदूषकों के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण बनता है। वायुमंडल में ओजोन सांद्रता में परिवर्तन दक्षिणी गोलार्ध में पछुआ हवाओं को प्रभावित करता है और साथ ही दक्षिणी महासागर में सतह के करीब नमक और तापमान के विपरीत स्तर का कारण बनता है। दोनों अलग-अलग तरीकों से समुद्री धाराओं को प्रभावित करते हैं, जिससे समुद्र के तापमान पर असर पड़ता हैं।

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समुद्र तेजी से हो रहे गर्म

वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि ओजोन पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण शीतलन तंत्रों में से एक को कमजोर कर सकता है। वायुमंडल के निचले स्तर पर बढ़ती ओजोन के चलते पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस बन रही है। एक नए अध्ययन से पता चला है कि वायुमंडल के ऊपरी और निचले वातावरण में ओजोन के स्तर में परिवर्तन 20 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अंटार्कटिका की सीमा से लगे समुद्र के पानी में बढ़ती गर्मी लिए जिम्मेदार है। दक्षिणी महासागर का तेजी से गर्म होना, पृथ्वी के गर्म होने पर अतिरिक्त गर्मी को सोखने के मुख्य क्षेत्रों में से एक के रूप में इसकी भूमिका को प्रभावित करता है। इस वार्मिंग का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल के निचले वातावरण में ओजोन की मात्रा में वृद्धि का परिणाम था। ओजोन स्मॉग के मुख्य घटकों में से एक है। ये प्रदूषक के रूप में पहले से ही खतरनाक है, लेकिन शोध से पता चलता है कि यह आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

घट रही है समुद्र की क्षमता

वायुमंडलीय रसायन विज्ञान में एक एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययन के लेखकों में से एक डॉ माइकेला हेगलिन के मुताबिक "पृथ्वी की सतह के करीब ओजोन लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है। सामान्य तौर पर पृथ्वी पर ज्यादा गर्मी बढ़ने पर समुद्र उस गर्मी को सोख लेते हैं और धरती को ठंड़ा रखते हैं। लेकिन इस अध्ययन से पता चलता है कि पृथ्वी की सतह के करीब बढ़ता ओजोन का स्तर समुद्र की अतिरिक्त गर्मी को अवशोषित करने की क्षमता पर भी बड़ा प्रभाव डालता है। ऐसे में इस अध्ययन से साफ पता चलता है कि अपर धरती के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करना है तो हमें पृथ्वी की सतह पर बढ़ते ओजोन के स्तर को कम करना होगा।

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इस अध्ययन को करने के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने 1955 और 2000 के बीच ऊपरी और निचले वातावरण में ओजोन स्तरों में बदलाव का अध्ययन करने के लिए मॉडल का इस्तेमाल किया, ताकि उन्हें अन्य प्रभावों से अलग किया जा सके और दक्षिणी महासागर की गर्मी पर ओजोन के बढ़ते स्तर के प्रभाव को समझने में मदद मिले। इन सिमुलेशन से पता चला है कि ऊपरी वायुमंडल में ओजोन में कमी और निचले वातावरण में वृद्धि दोनों ने उच्च अक्षांशों में समुद्र के पानी के ऊपरी 2 किमी के हिस्से में ग्रीनहाउस गैस में वृद्धि के कारण गर्मी को बढ़ाया है।

शोध के परिणामों के मुताबिक अध्ययन के अवधि के दौरान दक्षिणी महासागर के पानी में बढ़ी कुल गर्मी में 60 फीसदी हिस्सेदारी ओजोन के बढ़े स्तर की वजह से थी। यह आश्चर्यजनक था क्योंकि ट्रोपोस्फेरिक ओजोन वृद्धि को मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध में एक क्लाइमेट फोर्स के तौर पर देखा जाता है। इस हिस्से में ओजोन को मुख्य प्रदूषकों में से एक माना जाता है।

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1980 के दशक में चर्चा में आया ओजोन

1980 के दशक में ओजोन तब सुर्खियों में आया था जब दक्षिणी ध्रुव के ऊपर वायुमंडल में ओजोन परत में एक छेद की खोज की गई थी, जो उद्योग और उपभोक्ता उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली गैस क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) के कारण हुई थी। ओजोन परत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह खतरनाक पराबैंगनी विकिरण को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने से रोकती है। इस खोज ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को जन्म दिया, जो सीएफ़सी के उत्पादन को रोकने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता था।

करने होंगे अंतरराष्ट्रीय प्रयास

डॉ हेगलिन कहते हैं कि सीएफ़सी उपयोग में कटौती पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता से पता चलता है कि ग्रह को नुकसान को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई संभव है। ऐसे में वायुमंडल की निचली सतह पर बढ़ती ओजोन को रोकने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय प्रयास करने होंगे।