श्री दरबार साहिब से प्रसारित गुरुबाणी पर सभी का अधिकार, सीएम मान बोले- प्रसारण का खर्च उठाएगी पंजाब सरकार

 

पंजाब के सीएम भगवंत मान की फाइल फोटो।

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने कहा कि श्री दरबार साहिब से प्रसारित होने वाली गुरबाणी की खर्च पंजाब सरकार उठाएगी। अभी तक यहां से सिर्फ पीटीसी पर ही प्रसारण होता है। सीएम ने इस संबंध में एसजीपीसी को कहा है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री दरबार साहिब से प्रसारित होने वाली गुरबाणी को सभी माध्यमों से प्रसारित करने का खर्च उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को इसके लिए जिस किस्म के इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है वह पंजाब सरकार उपलब्ध करवाएगी।

यह ऐलान करके सीएम भगवंत मान ने सुखबीर बादल परिवार के गुरुबाणी प्रसारण के एकाधिकार को तोड़ने की ओर कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने एसजीपीसी से अपील की कि लेटेस्ट टेक्नोलाजी के कैमरे और अन्य तकनीकों पर जो भी खर्च होगा वह पंजाब सरकार वहन करेगी। हम चाहते हैं कि सचखंड की गुरुबाणी का विश्वभर में प्रसार हो सके।बता दें, दरबार साहिब से गुरबाणी का प्रसारण इस समय केवल पीटीसी पर ही हो रहा है, जिस पर सुखबीर बादल परिवार का एकाधिकार है। लंबे समय से अन्य टीवी चैनल और धार्मिक संगठन मांग करते आ रहे हैं कि गुरुबाणी के प्रसारण का अधिकार सभी को मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पीटीसी जो सुखबीर बादल का अपने अधिकार वाला टीवी चैनल है केवल उसी को गुरुबाणी प्रसारण के अधिकार मिले हुए हैं।

एसजीपीसी के पूर्व सदस्य अमरिंदर सिंह ने कहा कि पीटीसी चैनल जो अब तक गुरुबाणी का प्रसारण कर रहा था उसके प्रबंधकों पर पिछले दिनों शारीरिक शोषण के न केवल केस दर्ज हुए हैं, बल्कि कल उन्हें इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया है। ऐसे में पीटीसी चैनल को खुद ही दरबार साहिब से दूर हो जाना चाहिए। अगर सरकार इस एकाधिकार को खत्म करके कोई सुचारू प्रसारण करना चाहती है तो यह स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि इसका राजनीतिककरण नहीं होना चाहिए।

1998 में पहली बार आया था मामला

1998 में यह मामला उस समय सामने आया जब पंजाबी वर्ल्ड नाम का चैनल लांच हुआ। यह पंजाबी का पहला निजी चैनल था। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तब के प्रधान जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा ने चैनल के मालिकों से कहा कि वह श्री दरबार साहिब की गुरुबाणी को दुनिया भर में प्रसारित करें। चूंकि उन दिनों 1999 में खालसा पंथ की त्रैशताब्दी मनाई जानी थी, इसलिए चैनल ने उनकी मांग मान ली और एसजीपीसी ने प्रसारण के अधिकार उन्हें दे दिए, लेकिन यहां मात्र छह महीने ही प्रसारण चल सका।

इसके बाद ईटीसी नाम के पंजाबी चैनल को अधिकार दिए गए और काफी समय तक इसी टीवी के पास गुरुबाणी के प्रसारण का अधिकार रहा। 2007 में जब अकाली-भाजपा गठबंधन फिर से सरकार में लौटा तो यह अधिकार पीटीसी को दे दिए।

1973 के आनंदपुर प्रस्ताव में रेडियो से गुरुबाणी प्रसारण की मांग थी शामिल

काबिलेगौर है कि 1973 के आनंदपुर प्रस्ताव में पंजाब की अन्य मांगों के साथ साथ आल इंडिया रेडियो के जालंधर केंद्र से सुबह और शाम को दरबार साहिब से गुरुबाणी का प्रसारण करने की मांग शामिल थी, लेकिन यह मांग राजनीतिक उलझनों में फंसकर रह गई।

क्या सीएम ने केंद्र से बात कर ली है: डा. चीमा

उधर, शिरोमणि अकाली दल ने इस मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह ऐलान बिना तैयारी के किए हैं। पार्टी प्रवक्ता डा. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का यह ऐलान उनकी पिछली घोषणाओं की तरह बिना तैयारी वाला है। सीएम को पता होना चाहिए कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय केंद्र सरकार के पास है। संगत की तो यह मांग धर्मयुद्ध मोर्च के दौरान से ही मांग रही है कि आकाशवाणी से गुरुबाणी का प्रसारण किया, लेकिन बड़ी लंबी जद्दोजहद के बावजूद यह मांग पूरी नहीं हुई। डा. चीमा ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री ने इस बारे में केंद्र सरकार से बात कर ली है।