जलवायु परिवर्तन की मार, तापमान में हो रही वृद्धि लगातार

 

ग्रीष्‍मलहर के हालात के लिए जमीन तैयार हो रही है।

उत्‍तर-पश्चिम के मैदानों में भी पारा चढ़ रहा है ग्रीष्‍मलहर के हालात के लिए जमीन तैयार हो रही है। जम्‍मू-कश्‍मीर हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड जैसे पहाड़ी राज्‍यों में भी गर्मी महसूस की जा रही है जहां पहले मार्च के महीने में भी बर्फ गिरा करती थी।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। जहां मार्च का महीना इस बार 100 सालों से भी ज्यादा गर्म साबित हुआ है। वहीं, दिल्ली में भी पिछले 72 सालों के दौरान दूसरा सबसे गर्म महीना रहा। हैरत की बात यह कि अब दिन की नहीं बल्कि रातें भी गर्म होने लगी हैं। उत्‍तर-पश्चिम के मैदानों में भी पारा चढ़ रहा है, ग्रीष्‍मलहर के हालात के लिए जमीन तैयार हो रही है। जम्‍मू-कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड जैसे पहाड़ी राज्‍यों में भी गर्मी महसूस की जा रही है, जहां पहले मार्च के महीने में भी बर्फ गिरा करती थी।

इन हालात में घोषित होता है हीटवेब

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार मैदानी इलाकों, तटीय क्षेत्रों तथा पर्वतीय इलाकों में अधिकतम तापमान क्रमश: 40 डिग्री सेल्सियस, 37 डिग्री सेल्सियस और 30 डिग्री सेल्सियस पहुंचने पर उसे हीटवेव घोषित किया जाता है। ये तापमान सामान्‍य से 4-5 डिग्री सेल्सियस अधिक होते हैं। अगर यह सामान्‍य से 5-6 डिग्री सेल्सियस अधिक होते तो इसे प्रचंड हीटवेव कहा जाता है।

साल दर साल तापमान में हो रही वृद्धि

स्‍काइमेट वेदर में मौसम विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन के एवीपी महेश पलावत बताते हैं, “जहां हम यह उम्‍मीद कर रहे थे कि तपिश मार्च के अंत तक मध्‍य और उत्‍तर-पश्चिमी भारत के हिस्‍सों पर अपना असर दिखायेगी लेकिन हमें इसके इतनी जल्‍दी आने की उम्‍मीद नहीं थी। मगर यह हमारे लिये कोई चौंकाने वाली बात नहीं है, क्‍योंकि पिछले कुछ सालों में हम दिन के तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि होते देख रहे हैं। अधिकतम तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है और अब यह वैश्विक माध्‍य तापमान में वृद्धि के साथ खड़ा है।”

पूरे विश्व का बढ़ रहा तापमान

वैश्विक तापमान बढ़ चुका है और अगर आने वाले समय में इसे रोका नहीं गया तो इसमें और भी वृद्धि होने की सम्‍भावना है। दुनिया भर के वैज्ञानिक बार-बार इसे दोहरा भी रहे हैं ।