विश्व के अन्य देशों की तुलना में हमारे यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च काफी कम- अनिरुद्ध सेन

 


समाज में एक अर्थपूर्ण बदलाव लाना चाहते हैं।

कंपनी के सह-संस्थापक एवं सीईओ अनिरुद्ध सेन इसके जरिये समाज में एक अर्थपूर्ण बदलाव लाना चाहते हैं। वह कहते हैं ‘विश्व के अन्य देशों की तुलना में हमारे यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च काफी कम है जबकि यहां प्रति व्यक्ति आय दिनोंदिन बढ़ रही है।

नई दिल्‍ली। पश्चिमी यूरोप, अमेरिका, जापान एवं दक्षिण कोरिया की तुलना में भारत का हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर अब भी शैशवास्था में है। देश में इस समय 25 से अधिक जनरल इंश्योरेंस कंपनियां हैं, जिन्हें हेल्थ इंश्योरेंस उपलब्ध कराने का लाइसेंस प्राप्त है। बाजार की मांग को देखते हुए यह संख्या काफी कम है। कोरोना काल में जरूर कई इंश्योर टेक कंपनियां मार्केट में आई हैं, जो अलग-अलग तरह की समस्याओं का समाधान दे रही हैं। ‘केनको हेल्थ‘ एक ऐसी ही इंश्योरटेक कंपनी है जो 250 बिलियन डालर से अधिक के ओपीडी मार्केट की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास कर रही है।

कंपनी के सह-संस्थापक एवं सीईओ अनिरुद्ध सेन ने बताया कि कोविड के बाद जरूर लोग थोड़े सचेत एवं संवेदनशील हुए हैं। केनको के माध्यम से हमारी कोशिश उन्हें कांप्रिहेंसिव प्लान उपलब्ध कराने की है, जिसमें ओपीडी (आउटपेशेंट डिपार्टमेंट कास्ट) एवं अस्पताल का खर्च, दोनों कवर होता है। इसके लिए लोगों की जेब पर अधिक दबाव भी नहीं पड़ता। हाल ही में कंपनी ने 1.2 करोड़ डालर भी रेज किए हैं।’

हास्पिटैलिटी एवं हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में 20 वर्षो से अधिक का अनुभव रखने वाले कोलकाता के अनिरुद्ध सेन ने 2002 में आइटीसी, कोलकाता (होटल चेन) से मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। वहां करीब नौ वर्ष काम करने के बाद उन्होंने इंडियन स्कूल आफ बिजनेस से एमबीए किया। वहीं, कैंपस सेलेक्शन में उन्हें मैक्स बूपा इंश्योरेंस कंपनी में काम करने का आफर मिला। इंश्योरेंस की खास जानकारी न होने के बावजूद उन्होंने कंपनी ज्वाइन कर ली। वहां दो वर्ष काम करने के बाद वह ‘सिगनाटीटीके’ कंपनी चले गए, जहां करीब आठ वर्ष काम किया। इस तरह, उन्हें इंश्योरेंस आपरेशंस एवं टेक्नोलाजी क्षेत्र में काम करने का अच्छा अनुभव हो चुका था। इसके बाद वह कुछ नया करना चाहते थे, इसलिए कंपनी के ही अपने सहयोगी धीरज गोयल से केनको हेल्थ के आइडिया पर बात की। करीब डेढ़ वर्ष के बैकग्राउंड वर्क (लीगल, प्राइसिंग, लाइसेंस आदि का काम) के बाद अक्टूबर 2020 में इसे बाकायदा लांच कर दिया गया। शुरुआत एक छोटी टीम से हुई। आज इसके करीब 350 सदस्य हैं।

ओपीडी खर्च का भी इंश्योरेंस कवर: अनिरुद्ध बताते हैं कि हमारे यहां एक बड़े कामकाजी वर्ग को कंपनियों की ओर से हेल्थ कवरेज मिलती है या फिर वे हेल्थ इंश्योरेंस को अफोर्ड कर सकते हैं। दूसरी ओर वह वर्ग है जो असंगठित क्षेत्र में काम करता है और इंश्योरेंस के दायरे से बाहर है। कई कंपनियों में भी कर्मचारियों को हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा देना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा, एक सच्चाई यह भी है कि 75 प्रतिशत से अधिक लोगों के स्वास्थ्य सेवा का खर्च हास्पिटल के बाहर होता है। चाहे वह डाक्टर की फीस हो, दवाओं का खर्च हो, डायग्नोस्टिक टेस्ट हों। लेकिन विडंबना यह है कि इंश्योरेंस कंपनियां इन्हें कवर नहीं करती हैं। वे सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने के बाद के खर्च को कवर करती हैं। ‘केनको’ में हमने इन सारी कमियों को दूर करने का प्रयास किया है। कई प्रकार के इनोवेशंस किए हैं, जैसे प्रोडक्ट की फ्लैट प्राइसिंग की गई है यानी उस पर किसी की उम्र या स्थान का प्रभाव नहीं होता है। ओपीडी का 90 प्रतिशत तक खर्च कवर हो जाता है। वरिष्ठ नागरिकों, मधुमेह रोगियों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए भी स्कीम है। पूरा माडल ‘मंथली सब्सक्रिप्शन’ पर आधारित है।

सही टैलेंट हायर करने की रही चुनौती: कंपनी की शुरुआती नीतियों की बात करें, तो तमाम उद्यमियों की तरह अनिरुद्ध के सामने लीडरशिप हायरिंग एक बड़ा चैलेंज रहा, क्योंकि काबिल पेशेवरों के पास मल्टीपल आफर्स होते हैं। ऐसे में उपयुक्त कैंडिडेट के चुनाव और उन्हें टीम में शामिल करने में समय लगा। इसके अलावा, टेक टैलेंट को हायर करने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे सारी दिक्कतें दूर होती चली गईं।

पेशेवर अनुभव हासिल करना है फायदेमंद: अनिरुद्ध की मानें, तो एक लीडर में कई गुणों का मिश्रण होता है। वहीं, जब एक पार्टनर के साथ बिजनेस किया जाता है, तो एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करना होता है। अच्छी बात यह है कि वे दोनों पार्टनर एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों लंबे अर्से से साथ रहे हैं। धीरज के पास जहां एक्चुरियल साइंस, फाइनेंस का वृहद अनुभव है, वहीं अनिरुद्ध टेक डिस्ट्रीब्यूशन एवं आपरेशन संभालने में दक्ष हैं। बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को सुझाव देते हुए अनिरुद्ध कहते हैं, ‘पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें। कुछ वर्ष का कार्य-अनुभव हासिल करें। थोड़े पैसे की बचत करें। उसके बाद ही बिजनेस में कदम रखने का फैसला करें। मैंने खुद ऐसा ही किया है। हर कदम पर कुछ न कुछ सीखते हुए आगे बढ़ा हूं और आगे भी लगातार कुछ नया सीखने के लिए उत्सुक रहता हूं।’