दहेज को समाज के लिए बेहतर बताने वाली पुस्तक पर नर्सिंग काउंसिल ने जताई आपत्ति, जानें पूरा मामला

 

समाजशास्त्र की पाठ्यपुस्तक के कंटेंट पर नर्सिंग काउंसिल ने जताई आपत्ति

समाजशास्त्र (Sociology) के पाठ्यपुस्तक में दहेज को लेकर लिखे गए एक उद्धरण पर भारत के नर्सिंग काउंसिल ने आपत्ति जताई है और इसपर स्पष्टीकरण की मांग की है। इस उद्धरण में दहेज को समाज के लिए अच्छा बताया गया है।

 नई दिल्ली, एएनआइ। नर्सिंग काउंसिल के सिलेबस में शामिल एक पाठ्यपुस्तक के दहेज संबंधित उद्धरण पर इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने आपत्ति जताई और एक बयान भी जारी किया है। पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुस्तक में दहेज को समाज के लिए अच्छा बताया गया है। उद्धरण के अनुसार दहेज (dowry) वास्तव में समाज के लिए अच्छा होता है और तो और यह उन माता-पिताओं की भी मदद करता है जिनकी बेटियां दिखने में साधारण हैं। इस पुस्तक को 'Textbook of Sociology for Nurses' का नाम दिया गया है। इसे टीके इंद्राणी (TK Indrani) ने लिखा है और यह B.Sc. सेकेंड ईयर के विद्यार्थियों के सिलेबस में शामिल है। इस सामग्री को लेकर सोशल मीडिया पर काफी हंगामा हुआ।

नर्सिंग काउंसिल ने जारी किया ये बयान

नर्सिंग काउंसिल ने ऐतराज जताया। इसका कहना है, 'कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री का काउंसिल समर्थन नहीं करती है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि नर्सिंग प्रोग्राम के लिए केवल वही सिलेबस प्रस्तावित हैं जिनका जिक्र INC की वेबसाइट पर है। काउंसिल द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि INC नीतियों के तहत किसी ऐसे लेखक या प्रकाशन का समर्थन नहीं करता जो कानून का उल्लंघन करते हैं। पुस्तक में यह भी लिखा गया है कि दहेज की बोझ से बचने के लिए कई पैरेंट्स ने अपनी बेटियों को पढ़ाना शुरू कर दिया है और कहा है कि जब लड़कियां शिक्षित होंगी या नौकरी करेंगी तो दहेज की मांग कम हो जाएगी।

'दहेज से गृहस्थी बसाने में मिलती है मदद' 

पुस्तक में यह भी जिक्र है कि दहेज के तौर पर दिए गए फ्रिज, टीवी व अन्य सामानों के साथ नई गृहस्थी बसाने में मदद मिलती है। पिता की ओर दिया जाने वाला दहेज बेटी की संपत्ति होती है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस मामले पर नर्सिंग काउंसिल के पाठ्यक्रम से दहेज प्रथा विषय को हटाने की मांग उठने लगी है। शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पुस्तक के उक्त पृष्ठ को शेयर भी किया और  इसे शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा है कि यह शर्म की बात है। वहीं, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस पुस्तक को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग की है।