दिल्ली में एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगेगा प्रतिबंध, पढ़िए पूरी गाइडलाइन

 

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण रोकने के लिए 14 सूत्रीय ऐक्शन प्लान तैयार।

सरकार प्रदेश से निकलने वाले इलेक्ट्रानिक कचरे के निस्तारण के लिए ई वेस्ट पार्क बनाने जा रही है जिसमें इस कचरे को सुरक्षित तरीके से निपटाया जाएगा। पार्क बनाने की जगह की तलाश की जा रही है। लोगों को भी जागरुक किया जाता है।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। प्रदूषण देश की राजधानी के लिए एक बड़ी चुनौती है। सर्दियों में दम फुलाने वाला प्रदूषण अब भी परेशान कर रहा है। इसलिए सर्दियों की तरह ही गर्मियों में भी प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार एक एक्शन प्लान पर काम करेगी। इस सबंध में सोमवार को पर्यावरण मंत्री गोपाल राय की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभागों की बैठक में एक्शन प्लान बनाने पर निर्णय लिया गया। जिसमें कुल 14 ¨बदुओं (सूत्र) पर काम करने के लिए कहा गया है। संबंधित विभागों से कहा गया किया कि वह प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अपना समर एक्शन बनाकर दें।

कूड़ा जलाने पर कार्रवाई: तमाम प्रतिबंधों के बावजूद दिल्ली में कूड़ा जलाया जा रहा है। हाल ही में गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगी आग ने राजधानी के पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया। सरकार की योजना है कि कचरे में आग लगाने की घटनाओं को रोका जाए। इसकी निगरानी भी बढ़ाई जाए।

सड़कों की धूल: राजधानी में प्रदूषण का बड़ा कारण सड़कों पर उड़ती धूल है। यह धूल सड़कों के खुले (कच्चे) किनारों और वाहनों के चलने से उड़ती है। दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि राजस्थान की ओर से धूल भरी हवाएं भी यहां प्रदूष्ण बढ़ाती हैं। पानी का छिड़काव किया जा रहा है। सड़कों के कच्चे किनारे पक्के किए जाएंगे।

ईको क्लब गतिविधियां:पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक करने के लिए सरकार स्कूलों में इको क्लब गतिविधियां चलाती है। जिनमें बच्चों को पेंटिंग, निबंध, भाषण प्रतियोगिता के जरिये पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया जाता है। लोगों को भी जागरुक किया जाता है।

रियल टाइम सोर्स अपोर्समेंट अध्ययन: दिल्ली सरकार ने आइआइटी कानपुर के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत पंडारा रोड पर सुपर साइट विकसित की जा रही है। जिसमें उपकरणों के माध्यम से विशेषज्ञ पता लगाएंगे कि किस समय, किस वजह से और कितना प्रदूषण फैल रहा है।

शहरी खेती: शहरी खेती से तात्पर्य घर के बाहर व छत पर की बागवानी से है। सरकार इसे बढ़ावा देगी, ताकि लोग अपने घर की छतों व घर के बाहर ही किचिन गार्डन तैयार कर सकें। इन छोटे प्रयासों से भी प्रदूषण नियंत्रण की कोशिश की जाएगी।

झीलों का विकास: दिल्ली स्टेट वेटलैंड अथार्रिटी ने दिल्ली में 1043 ऐसे जलाशयों की तलाश की है, जो शहरीकरण के कारण छिन्न-भिन्न हो गए हैं। इनमें 119 झीलों को चिन्हित कर विकसित किया जा रहा है।

सड़क किनारे हरित क्षेत्र बढ़ाना: सड़कों के किनारे व डिवाइडर पर लगाए गए पौधे अधिकांशत: देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं। सरकार इन पौधों की सुरक्षा बढ़ाने के उपाए करेगी। साथ ही और पौधे रोपे जाएंगे।

पार्को का विकास: दिल्ली सरकार राजधानी के पार्को को धीरे-धीरे अपने हाथ में लेकर विकसित करेगी और इन्हें हरा-भरा बनाएगी। ताकि आसपास वातावरण सुधारा जा सके।

पौधारोपण: मानसून सीजन में हर साल पौधारोपण अभियान चलाया जाता है। सरकार की कोशिश है कि इसे और प्रभावी बनाया जाए। रोपने के बाद पौधों की सुरक्षा बढ़ाई जाए।

नगर वनों का विकास: सरकार की ओर से दिल्ली में 11 छोटे-छोटे वन विकसित किए जा रहे हैं। जिनमें घने वृक्ष लगाए गए हैं, जो वातावरण की कार्बन डाई आक्साइड को सोखेंगे।

सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प: एक जुलाई 2022 से दिल्ली सहित पूरे देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लग जाएगा। सरकार की योजना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प तलाशा जाए। हरित पहल कर इस पर निर्भरता कम की जाए।

ई वेस्ट पार्क: सरकार प्रदेश से निकलने वाले इलेक्ट्रानिक कचरे के निस्तारण के लिए ई वेस्ट पार्क बनाने जा रही है, जिसमें इस कचरे को सुरक्षित तरीके से निपटाया जाएगा। पार्क बनाने की जगह की तलाश की जा रही है।

औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण: औद्योगिक प्रदूषण राजधानी के लिए बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए बवाना में 14 एकड़ में प्रदेश की पहली सुरक्षित लैंडफिल साइट विकसित की गई है। यहां पर पूरी दिल्ली का औद्योगिक कचरा न केवल एकत्र किया जाएगा, बल्कि उसका सुरक्षित तरीके निस्तारण भी किया जाएगा।

वृक्ष प्रत्यारोपण नीति की निगरानी: दिल्ली सरकार ने 2020 के अंत में वृक्ष प्रत्यारोपण नीति लागू की थी। इसमें निर्माण कार्य के बीच में आने वृक्षों को काटने के बजाय दूसरी जगह सही तरीके से प्रत्यारोपित करना है। अब सरकार इस नीति की निगरानी करेगी।