कैंसर पीड़ितों की मदद कर पिता के सपनों को साकार कर रही आकृति, यूएन से मिला है वालिटियर पुरस्कार

 

बड़े अस्पतालों में स्तन कैसर पीड़ित महिलाओं की काउंसिलिंग करने की अलावा उन्हें प्रोस्थेटिक ब्रा उपलब्ध कराती है।

उन्होंने देश के कई बड़े स्किल डेवलपमेंट सेंटर से समझौता भी किया था और उन्हें रोजगार भी उपलब्ध भी कराया लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से उनकी यह मुहिम प्रभावित हो गई थी। अब इसे दोबारा से शुरू करने जा रहे हैं।

फरीदाबाद । आज भले ही विन ओवर कैंसर के संस्थापक सीए अरुण गुप्ता इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनकी द्वारा कैंसर पीड़ितों की सहायता के लगाया गया विन ओवर कैंसर रूपी पौधा वट वृक्ष बन गया है और इसकी छत्र छाया में कैंसर पीड़ितों मदद उपलब्ध कराई जा रही है। प्रत्येक कैंसर पीड़ित व उसके स्वजन को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से मजबूत करने के स्वप्न सीए अरुण गुप्ता की बेटी आकृति गुप्ता पूरा करने में लगी हुई है।र्ष 2015 में सीए अरुण गुप्ता को ब्लड कैंसर हुआ था। इनकी मजबूत इच्छा शक्ति और जीवन जीने की चाह ने कैंसर को मात दे दी, लेकिन पिछले वर्ष कोरोना की दूसरी लहर ने अपने साथ सदा ले गई। उस समय लगा था कि कैंसर पीड़ितों के सहायता के लिए आगे बढ़ने वाले अब नहीं बढ़ेंगे, लेकिन उनकी बेटी आकृति ने अपने पिता के सपनों को पूरा करने ठानी है। उनकी समाज सेवा की भावना को देखते हुए वर्ष 2020 में यूएन वालिंटियर पुरस्कार से सम्मानित किया था।

स्तन कैंसर पीड़ित महिलाओं में जगा रही हैं विश्वास: आकृति ने बताया कि स्तन कैंसर पीड़ित महिलाओं में इलाज के दौरान आत्मविश्वास की कमी आ जाती है। इसके चलते वह स्वयं को पिछड़ा समझने लगती है। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए आत्मविश्वास पैदा करना बहुत जरूरी है। इसके लिए वह दिल्ली और फरीदाबाद के बड़े अस्पतालों में स्तन कैसर पीड़ित महिलाओं की काउंसिलिंग करने की अलावा उन्हें प्रोस्थेटिक ब्रा उपलब्ध कराती है। वर्ष 2020 में 1500 और 2021 मे 2011 महिलाओं को उपलब्ध कराई है।

कैंसर पीड़ितों स्वजन को उपलब्ध कराते हैं रोजगार: आकृति ने बताया कि उनके पिता अरुण गुप्ता में जब ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई, तो शुरुआत में सभी दया की दृष्टि से देखते थे, लेकिन समय के साथ लोगों की सोच में बदलाव आने लगा। सामाजिक एवं आर्थिक रूप से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इन सबको ध्यान में रखते हुए कैंसर पीड़ित परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने का फैसला किया था। इसके तहत उन्होंने देश के कई बड़े स्किल डेवलपमेंट सेंटर से समझौता भी किया था और उन्हें रोजगार भी उपलब्ध भी कराया, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से उनकी यह मुहिम प्रभावित हो गई थी। अब इसे दोबारा से शुरू करने जा रहे हैं।

छोटी बहन भी करती है सहयोग

आकृति ने बताया कि उनकी छोटी बहन धृति अब 12वीं कक्षा में हैं और वह भी कैंसर जागरूकता के लिए कार्य करती है। उसने अपने स्कूल में कैंसर जागरूकता के लिए सेमिनार आयोजित कराए थे और खुद भी अपने सहपाठियाें को जागरूक करती रहती है।