वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार का एक्शन प्लान तैयार, जानिए किन बिंदुओं पर फोकस करते हुए किया जाएगा काम

 

सर्दियों में दम फुलाने वाला प्रदूषण गर्मी में भी लोगों को परेशान कर रहा है।

वह प्रदूषण के खिलाफ काम करने के लिए अपना समर एक्शन बनाकर दें। खुले में कचरा जलाना तमाम प्रतिबंधों के बावजूद दिल्ली में कूड़ा जलाया जा रहा है। हाल ही में गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगी आग ने राजधानी के पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया।

नई दिल्ली, संवाददाता। प्रदूषण देश की राजधानी के लिए एक बड़ी चुनौती है। सर्दियों में दम फुलाने वाला प्रदूषण अब भी परेशान कर रहा है। इसलिए सर्दियों की तरह ही गर्मियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। इसस बाबत सोमवार को पर्यावरण मंत्री गोपाल राय की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभागों की बैठक में एक्शन प्लान निर्णय लिया गया। जिसमें कुल 14 बिंदुओं (सूत्र) पर काम करने के लिए कहा गया है।

संबंधित विभागों से कहा किया कि वह प्रदूषण के खिलाफ काम करने के लिए अपना समर एक्शन बनाकर दें। खुले में कचरा जलाना तमाम प्रतिबंधों के बावजूद दिल्ली में कूड़ा जलाया जा रहा है। हाल ही में गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगी आग ने राजधानी के पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया। सरकार की योजना है कि कचरे में आग लगाने की घटनाओं को रोका जाएगा। इसकी निगरानी बढ़ाई जाएगी।

सड़कों की धूल

सड़कों की धूल राजधानी में प्रदूषण का बड़ा कारण है। यह धूल सड़कों के खुले (कच्चे) किनारों और वाहनों से चलने से उड़ती है। इसके अलावा दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि राजस्थान व हरियाणा की ओर से चलीं धूल भरी हवाएं भी यहां प्रदूषित बढ़ाती हैं। धूल पर नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है, इसे और बढ़ाया जाएगा। सड़कों के कच्चे किनारे पक्के किए जाएंगे।

औद्योगिक प्रदूषण

यहां औद्योगिक प्रदूषण बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए बवाना में 14 एकड़ में प्रदेश की पहली लैंडफिल साइड विकसित की गई है। यहां पर पूरी दिल्ली का औद्योगिक कचरा न केवल एकत्र किया जाएगा, बल्कि उसका सुरक्षित तरीके निस्तारण भी होगा।शहरी खेतीशहरी खेती से तात्पर्य घर के बाहर व छत पर की बागवानी से है। सरकार इसे बढ़ावा देगी, ताकि लोग अपने छतों व घर के बाहर ही किचिन गार्डन तैयार कर सकें। इन छोटे प्रयासों भी प्रदूषण नियंत्रण की कोशिश की जाएगी।

सड़क किनारे हरित क्षेत्र बढ़ाना

सड़कों के किनारे व डिवाइडर पर लगाए गए पौधे अधिकांशत देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं। सरकार की योजना है कि सड़कों के किनारे व डिवाइडर पर और अधिक पौधे रोपे जाएं और इनकी सुरक्षा बढ़ाने के उपाए किए जाएं। पार्को का विकासदिल्ली के सभी पार्क दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), एनडीएमसी और दिल्ली नगर (एमसीडी) के अंडर में आते हैं। दिल्ली सरकार इन्हें धीरे-धीरे अपने हाथ में लेकर विकसित कर हरा-भरा बनाएगी।

पौधारोपण

मानसून सीजन में हर साल पौधारोपण अभियान चलाया जाता है। सरकार की कोशिश है कि इसे और प्रभावी बनाया जाए। रोपने के बाद पौधों की सुरक्षा बढ़ाई जाए।

झीलों का विकास

दिल्ली स्टेट वेटलैंड अथार्रिटी ने दिल्ली में 1043 ऐसे जलाशयों की तलाश की है, जो शहरीकरण के कारण छिन्न-भिन्न हो गए हैं। इनमें 119 झीलों को चिन्हित कर विकसित किया जा रहा है। इससे पर्यावरण का संरक्षण होगा।

नगर वनों का विकास

सरकार की ओर से दिल्ली में 11 छोटे-छोटे वन विकसित किए जा रहे हैं। जिनमें घने वृक्ष लगाए गए हैं, जो वातावरण की कार्बन डाई आक्साइड को सोखेंगे और आक्सीजन की मात्रा पर्यावरण में बढ़ाएंगे।

इको क्लब गतिविधियां

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक करने के लिए सरकार स्कूलों में इको क्लब गतिविधियां चलाती हैं। जिनमें बच्चों को पेंटिंग, निबंध, भाषण प्रतियोगिता के जरिये पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया जाता है।

रियल टाइम सोर्स अपोर्समेंट अध्ययन

दिल्ली सरकार ने आइआइटी कानपुर के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत पंडारा रोड पर एक सुपर साइट विकसित की जा रही है। जिसमें उपकरणों के माध्यम आइआइटी के विशेषज्ञ पता लगाएंगे कि किस समय, किस वजह से और कितना प्रदूषण फैल रहा है।

ई-वेस्ट पार्क

सरकार प्रदेश से निकलने वाले इलेक्ट्रानिक कचरे के निस्तारण के लिए ई वेस्त पार्क बनाने जा रही है। जिसमें इस कचरे को सुरक्षित तरीके से निपटाया जाएगा। पार्क बनाने की जगह की तलाश की जा रही है।

वृक्ष प्रत्यारोपण नीति की निगरानी

दिल्ली सरकार ने 2020 के अंत में वृक्ष प्रत्यारोपण नीति लागू की थी। इसमें निर्माण कार्य के बीच में आने वृक्षों को काटने के बजाय दूसरी जगह सही तरीके से प्रत्यारोपित करना है। अब सरकार इस नीति निगरानी करेगी।

सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प

एक जुलाई 2022 से दिल्ली सहित पूरे देश में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रर प्रतिबंध लग जाएगा। सरकार की योजना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प तलाशा जाए। हरित पहल कर इस पर निर्भरता कम की जाए