केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बोले- नया माडल जेल मैनुअल तैयार कर रही सरकार, कई बिंदुओं पर किया गया फोकस

 

अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार एक नया माडल जेल मैनुअल बना रही है- ANI

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार एक नया माडल जेल मैनुअल बना रही है। इसे सभी राज्‍यों को भेजा जाएगा। इसमें कैदियों के पुनर्वास समेत कई बिंदुओं को समाहित किया जाएगा...

नई दिल्‍ली, पीटीआइ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि आपराधिक प्रक्रिया पहचान विधेयक (Criminal Procedure Identification Bill) लाने का मकसद देश की कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना है। लोकसभा में विचार के लिए आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक पेश करते हुए अमित शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार एक माडल जेल मैनुअल भी तैयार कर रही है जिसे राज्यों को भेजा जाएगा। 

शाह ने आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक पर लोकसभा को संबोधित करते हुए कहा कि नए जेल मैनुअल में बहुत सारी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। इसमें कैदियों के पुनर्वास, उन्हें फिर से मुख्यधारा का हिस्सा बनाने, जेल अधिकारियों के अधिकारों को सीमित करने, अनुशासन बनाए रखने, सुरक्षा जैसे मसलों से जुड़े विभिन्न प्रवि‍धान किए जाएंगे। इसमें महिला कैदियों के लिए अलग जेल की व्‍यवस्‍था और खुली जेल समेत अनेक बिंदुओं को समाहित किया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कैदियों की पहचान संबंधी 1920 के कानून की जगह लेने वाले दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक 2022 को लोकसभा में चर्चा के लिए रखते हुए कहा कि इस विधेयक को भावी माडन जेल मैनुअल के साथ समग्र रूप में देखे जाने की जरूरत है। शान ने कहा कि मौजूदा कानून स्थिति, विज्ञान, अदालतों में अपराध साबित करने के साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत करने जैसे विभिन्न चुनौतियों के समाधान को लेकर अप्रासंगिक हो गया है।

अमित शाह ने कहा कि दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक 2022 से अदालतों में दोषसिद्ध करने के लिए साक्ष्‍यों को बढ़ाया जा सकेगा। यह विधेयक लाने का सही समय है। यह हम कानूनों में समय पर बदलाव नहीं करेंगे तो दोषियों को सजा दिलाने में पिछड़ जाएंगे। इस विधेयक को अनेक प्रविधानों का अध्ययन करने के बाद अमलीजामा पहनाया गया है। उक्‍त विधेयक में आरोपियों के भौतिक और जैविक नमूने लेने के लिए पुलिस को कानूनी मंजूरी प्रदान करने का प्रयास किया गया है।