हाईकोर्ट ने कहा छात्रों को पुरस्कार देने में मनमानी नहीं कर सकता दिल्ली विश्वविद्यालय, जानिए क्या है पूरा मामला?

 

डीयू के आदेश को रद कर याची छात्र को संयुक्त रूप से पदक देने का दिया आदेश।

दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि बीए (आनर्स) अर्थशास्त्र के शैक्षणिक सत्र 2017-2020 के लिए संयुक्त रूप से याचिकाकर्ता एनी गुरमेहर कौर और यशवानी शेखावत को गोल्ड मेडल दिया जाए भले ही पुरस्कार की धनराशि यशवानी को दे दी जाए।

नई दिल्ली A.k.Aggarwal। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि छात्रों को स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) या पुरस्कार देने में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) मनमानी नहीं कर सकता है। यदि किसी छात्र ने पुनर्मूल्यांकन के बाद सर्वाधिक अंक हासिल किए हैं, तो ऐसे छात्र को पदक से वंचित करना उसके साथ अन्याय है। इस टिप्पणी के साथ ही न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने डीयू के छह मार्च 2014 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें विश्वविद्यालय ने छात्र को पुनर्मूल्यांकन के बाद मिले अंकों के आधार पर गोल्ड मेडल देने से इन्कार कर दिया था।

साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि बीए (आनर्स), अर्थशास्त्र के शैक्षणिक सत्र 2017-2020 के लिए संयुक्त रूप से याचिकाकर्ता एनी गुरमेहर कौर और यशवानी शेखावत को गोल्ड मेडल दिया जाए, भले ही पुरस्कार की धनराशि यशवानी को दे दी जाए। डीयू ने यशवानी शेखावत को सर्वाधिक अंक हासिल करने वाली छात्रा घोषित करते हुए पुरस्कार दिया था।दरअसल, गुरमेहर कौर ने भारतीय अर्थव्यवस्था-दो में अपनी परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन का विकल्प चुना था। इससे याचिकाकर्ता के अंक बढ़ गए थे।

इसके बाद डीयू के परीक्षा विभाग ने 18 फरवरी 2021 को पत्र जारी कर छात्रा की दावेदारी को खारिज कर दिया था। इसमें मूल अंकों के आधार पर पदक दिए जाने का तर्क दिया था। डीयू के इस निर्णय को छात्रा ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए शैक्षणिक सत्र 2017-2020 के लिए उक्त पाठ्यक्रम में उच्चतम स्कोरर के लिए पदक प्रदान करने का डीयू को निर्देश देने की मांग की थी।

इस पर डीयू ने अदालत में कहा कि छह मार्च 2014 को जारी आदेश के तहत गोल्ड मेडल और पुरस्कार डीयू द्वारा घोषित किए गए मूल परिणाम के आधार पर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को दिया जाएगा। इसमें पुनर्मूल्यांकन में अंक हासिल करने वाले छात्रों को नहीं शामिल किया जाएगा। इसे पीठ ने मनमाना करार देते हुए रद कर दिया। साथ ही कहा कि प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में परीक्षक की तरफ से गलती हुई थी। याचिकाकर्ता को पुनर्मूल्यांकन का लाभ मिलना चाहिए।