भाजपा की स्थापना का ऐतिहासिक गवाह है दिल्ली का फिरोजशाह कोटला का मैदान

 

BJP Foundation Day 2022: भाजपा की स्थापना का ऐतिहासिक गवाह है दिल्ली का फिरोजशाह कोटला का मैदान

BJP Foundation Day 2022 कभी सिर्फ 2 लोकसभा सांसदों वाली भारतीय जनता पार्टी वर्ष 2014 से लगातार केंद्र की सत्ता में है। इससे पहले वर्ष 1999 में भी अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में 2004 तक सत्ता में रही थी।

नई दिल्ली,  संवाददाता। आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना दिवस को बुधवार को पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भाजपा अब 42 साल की हो गई है। दो सांसदों से शुरू हुआ सफर आज केंद्र में बहुमत और देश के अधिकांश राज्यों में सरकारों के साथ वृहद-विस्तृत रूप ले चुका है। देश की नंबर एक पार्टी बन गई है। इसके उभार के साथ देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस लगातार सिकुड़ती जा रही है। अब स्थिति उसका राष्ट्रीय दल की हैसियत खोने तक आ गई है। पार्टी के कार्यकर्ता हाल के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में जीत से और उत्साहित हैं। यह उत्साह राष्ट्रीय राजधानी में भी है, लेकिन कम ही लोगों को यह जानकारी होगी कि इस पार्टी की आधारशिला और नामकरण दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान के ठीक बाहर बहादुर शाह जफर मार्ग पर एक कार्यक्रम में हुआ था। यह वहीं, मैदान है जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन के लिए विश्वविख्यात है।

बात 42 साल पहले छह अप्रैल 1980 की है। इस मैदान के आस-पास और दिल्ली में एक दिन पहले से ही पार्टी समर्थकों का जुटना शुरू हो गया था। दो-तीन पहले ही यह निर्णय लिया गया था कि जनता पार्टी में विलय होने वाली जनसंघ अब अलग होगी और नई पार्टी का गठन होगा। पार्टी की स्थापना और स्थापना कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े वरिष्ठ नेता गोपाल गर्ग बताते हैं कि वह स्टेज प्रबंधन के लिए बनाई गई समिति में थे। इसके लिए मैदान के बाहर एक दिन पहले से तैयारियां शुरू हो गई थी। मंच बनाने के साथ पानी और अन्य इंतजाम किए जाने लगे थे। तब बहादुर शाह जफर मार्ग के किनारे बड़े-बड़े पार्क नहीं होते थे। खाली जगह थी। वहीं, स्थापना कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। दिल्ली के कार्यकर्ताओं में बड़ा उत्साह था। देशभर से लोग दिल्ली पहुंचने लग गए थे। स्थिति यह हुई कि सुबह 10-11 बजे तक ही हजारों लोग जुट गए थे।

एक दिन पहले ही जानकारी मिली थी कि कांग्रेस पार्टी (ओ) के वरिष्ठ नेता सिकंदर बख्त, राजेश शर्मा, शांति देसाई व पीके चांदला जैसे नेता भी राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित होकर नई पार्टी का हिस्सा बने। इसी तरह मेवाराम आर्य भारतीय क्रांति दल से आए थे।

कार्यक्रम के संचालन और आयोजन की जिम्मेदारी विजय कुमार मल्होत्रा, मदन लाल खुराना, अरुण जेटली, विजय गोयल, केदारनाथ साहनी, राजेंद्र गुप्ता, सत्यनाराण बंसल, रामभज, मेवाराम आर्य, सुभाष आर्य व मूलचंद चावला समेत अन्य नेता जुड़े हुए थे।

गोपाल गर्ग बताते हैं कि वरिष्ठ नेताओं द्वारा नई पार्टी की रीति-नीति के साथ नाम पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया और इसी मार्ग से भारतीय सियासत में नई पार्टी के रूप में भाजपा का उदय हुआ। इसके बाद पार्टी का पहला अधिवेशन मुंबई (बांबे) में हुआ था।

वरिष्ठ भाजपा नेता सुमन गुप्ता बताते हैं कि तब वे लोग युवा थे और पूरे जोश से तैयारियों में जुटे हुए थे। नई पार्टी बनने के बाद गोपाल गर्ग को भाजपा युवा मोर्चा के चांदनी चौक जिले की जिम्मेदारी मिली, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अरुण जेटली युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। दिल्ली में पार्टी की कमान विजय कुमार मल्होत्रा को दी गई।

जानिये- ये अहम बातें

  • 42 साल पहले छह अप्रैल 1980 के एक दिन पहले ही इस मैदान के बाहर जुटने लग गए थे लोग, दोपहर में मैदान के बाहर फिरोजशाह रोड किनारे हुआ था नई पार्टी की स्थापना का कार्यक्रम, पार्टी की नीतियों और नाम के साथ दिशा-दशा पर हुई थी चर्चा
  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस कार्यक्रम में पार्टी के गठन और पार्टी के नाम की घोषणा की थी