दिल्ली के इन तालाबों की बदलेगी तस्वीर, माडल झील के रूप में होंगे विकसित

 

यही समिति सुनिश्चित करेगी कि झील में किसी तरह का गंदा पानी न पहुंचने पाए।

डीएसडब्ल्यूए ने जिलों के डीएम को माडल झीलें बनाने के सभी मापदंड भेज दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि झीलों को सुरक्षित रखने के लिए गांव की आरडब्ल्यूए या ग्राम पंचायत के स्तर पर एक समिति बनाई जाएगी।

नई दिल्लीsurender Aggarwal । राजधानी को झीलों का शहर बनाने के क्रम में शहरीकृत गांवों के 119 जलाशयों का चयन किया गया है। इस दिशा में मानदंड तय करने के साथ-साथ आगे का काम भी शुरू किया गया है। इन जलाशयों के बदबूदार पानी को साफ कर वहां मछलियां, कछुए आदि जलीय जीव छोड़े जाएंगे। इससे लोग जब यहां सुबह-शाम घूमने के लिए जाएंगे तो उन्हें किसी पर्यटन स्थल के जैसा अनुभव होगा।

दिल्ली स्टेट वेटलैंड अथारिटी (डीएसडब्ल्यूए) ने पहले चरण में आठ जिलों की झीलों को विकसित करने का काम शुरू किया है। इसके लिए कुछ मापदंड भी बनाए हैं। मसलन, पानी में बदबू न होना, झीलों में जीवों की उपस्थिति रहना और डिजाल्वड आक्सीजन (डीओ) का स्तर तीन मिली ग्राम (एमजी) प्रति लीटर से ज्यादा होना इत्यादि।

डीएसडब्ल्यूए के अधिकारियों के अनुसार राजस्व विभाग ने इन झीलों की पहचान कर ली है। डीएसडब्ल्यूए ने जिलों के डीएम को माडल झीलें बनाने के सभी मापदंड भेज दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि झीलों को सुरक्षित रखने के लिए गांव की आरडब्ल्यूए या ग्राम पंचायत के स्तर पर एक समिति बनाई जाएगी। यही समिति सुनिश्चित करेगी कि झील में किसी तरह का गंदा पानी न पहुंचने पाए। झीलों के आसपास कूड़ा न डाला जाए और वहां अतिक्रमण न हो।

संबंधित एजेंसियों को यह भी निर्देश है कि वह इन झीलों को भूजल से नहीं, बल्कि उपचारित पानी से भरें। यदि गंदे पानी को वहां आने से रोकना संभव ना हो तो झील में जाने से पूर्व उसके शोधन करने की व्यवस्था करें। बारिश के पानी को झीलों तक पहुंचाने के लिए रास्ते बनाएं। सभी माडल झीलों पर नियमों को लेकर साइनबोर्ड भी लगे होंगे। गांव स्तर पर बनी समितियां इन झीलों को लेकर जन जागरुकता अभियान भी चलाएगी।

600 जलाशयों के पुनर्विकास पर खर्च होंगे 700 करोड़: वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में दिल्ली को झीलों का शहर बनाने के लिए 750 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इससे भूजल के स्तर में भी सुधार होगा। दिल्ली स्टेट वेटलैंड अथारिटी ने जीयो टै¨गग के जरिये दिल्ली के 1043 जलाशयों की पहचान की है, इनमें 600 के आसपास झीलें हैं। वनस्पति शास्त्री प्रो. सी आर बाबू की निगरानी में एक तकनीकी समिति इस पर काम कर रही है।