हरियाणा ने अब पंजाब के खिलाफ नया मोर्चा खोला, भाखड़ा नहर का विकल्प तैयार करने का बनाया दबाव

 

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान। (फाइल फोटो)

Haryana Punjab Water Dispute हरियाणा और पंजाब के जल विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। हरियाणा ने एसवाईएल नहर के साथ ही अब भाखड़ा मेन नहर का विकल्‍प तैयार करने के लिए पंजाब पर दबाव बना दिया है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब से सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के जरिये रावी और ब्यास का पानी लेने की लड़ाई लड़ रहे हरियाणा ने अब भाखड़ा मेन लाइन (बीएमएल) नहर को लेकर मोर्चा खोला है। हरियाणा ने 60 साल पुरानी इस नहर का विकल्प तैयार करने के लिए पंजाब पर दबाव बनाया है ताकि इस नहर के टूटने की स्थिति में दूसरी नहर के जरिये हरियाणा की प्यासी धरती तक पानी पहुंचाया जा सके।

मनोहर बोले, 60 साल पुरानी नहर टूटी तो डूब जाएगा पंजाब का बड़ा हिस्सा, हरियाणा रह जाएगा सूखा

राजधानी चंडीगढ़ पर अपना हक जताते हुए दोनों प्रदेश विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर चुके हैं जिस पर राजनीति गर्माई हुई है। इस बीच बुधवार को पत्रकारों से रू-ब-रू मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जर्जर हो चुकी बीएमएल नहर टूटी तो पंजाब का काफी हिस्सा डूब जाएगा, जबकि हरियाणा का बड़ा हिस्सा सूखाग्रस्त हो जाएगा। इसलिए समय रहते भाखड़ा मेन लाइन की वैकल्पिक नहर तैयार की जाए।

सीएम मनोहर लाल ने कहा कि जहां तक सतलुज यमुना संपर्क नहर (एसवाईएल नहर) की बात है, तो साफ कर दूं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के पक्ष में आ चुका है और सिर्फ क्रियान्वयन संबंधी आदेश का इंतजार है जिससे पता चलेगा कि नहर कैसे बनेगी और कौन सी एजेंसी इसे बनाएगी।

पंजाब का सरप्लस पानी नहीं होने का दावा बेबुनियाद, हम आनुपातिक रूप से मांग रहे हिस्सा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पंजाब ने बहाना बनाया कि उसके पास सरप्लस पानी नहीं है, जबकि हम तो सिर्फ अपने अनुपात के हिसाब से पानी मांग रहे हैं। कुल उपलब्ध पानी में से हरियाणा को उसका आनुपातिक हिस्सा मिलना चाहिए। बीएमएल हांसी बुटाना कनाल को भाखड़ा की मेन लाइन से जोड़ने पर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नारनौल, रेवाड़ी, मंडी अटैली, बावल, झज्जर, जाटूसाना, महेंद्रगढ़, जींद के किसानों को सिंचाई पानी उपलब्ध हो सकेगा।

पंजाब विश्वविद्यालय में हिस्सेदारी बहाल करने के लिए केंद्र को लिखी चिट्ठी

पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा की हिस्सेदारी बहाल करने के लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है। इसके लिए सरकार पंजाब विश्वविद्यालय को आर्थिक मदद देने के लिए भी तैयार है। पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में 92 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार का और पंजाब व हरियाणा का चार-चार प्रतिशत हिस्सा था।

इस यूनिवर्सिटी से पहले पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर के कालेज जुड़े हुए थे। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने फंड देने से मना करते हुए हिस्सेदारी खत्म कर दी थी। चूंकि पंजाब विश्वविद्यालय में 85 प्रतिशत सीटें चंडीगढ़ के विद्यार्थियों के लिए हैं, इसलिए हरियाणा के छात्रों को यहां दाखिला बेहद कम मिल पाता है।

सरकारी पैसे पर पहला हक गरीबों का

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा हरियाणा में 30 लाख लोगों (11.6 प्रतिशत) के गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी मापने का कोई सटीक पैमाना नहीं है। पहले 1.20 लाख रुपये की सालाना आय वाले परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे माना जाता था जिसे हमने 1.80 लाख रुपये कर दिया है। सरकारी खजाने पर पहला हक गरीबों का है। इसलिए हम अंत्योदय योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना सुनिश्चित कर रहे हैं।