राज्यसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद कांग्रेस के लिए विवेक तन्खा बन सकते हैं चुनौती

 

राज्यसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद कांग्रेस के लिए विवेक तन्खा बन सकते हैं चुनौती। फाइल फोटो

Madhya Pradesh 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा न भेजने की कीमत सत्ता गंवा कर चुकाने वाले कमल नाथ फिर दिग्गजों के अरमानों से जूझते दिखाई पड़ रहे हैं। किसी तरफ रुख करने के बजाए कमल नाथ तन्खा को ही फिर राज्यसभा भेजने की सिफारिश हाईकमान से कर सकते हैं।

भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव फिर कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। विवेक तन्खा का कार्यकाल पूरा होने पर राज्यसभा के लिए अरुण यादव और अजय सिंह की दावेदारी के संकेत हैं। 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा न भेजने की कीमत सत्ता गंवा कर चुकाने वाले कमल नाथ फिर दिग्गजों के अरमानों से जूझते दिखाई पड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी तरफ रुख करने के बजाए कमल नाथ तन्खा को ही फिर राज्यसभा भेजने की सिफारिश हाईकमान से कर सकते हैं। जून, 2016 में तन्खा जीत दर्ज कर राज्यसभा पहुंचे थे। दरअसल, राज्यसभा पहुंचने की खींचतान के आसार की जड़ में अरुण यादव और कमल नाथ के बीच पुरानी तकरार है।

कमल नाथ के फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं अरुण यादव

2018 में विधानसभा चुनाव से पहले अरुण यादव को हटाकर कमल नाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। यादव ने तब बिना किसी प्रतिक्रिया के कांग्रेस की एकजुटता में भूमिका निभाई और पार्टी की सत्ता में वापसी हुई। हालांकि, कमल नाथ सरकार में वह खुद को उपेक्षित महसूस करते रहे। यादव ने नंदकुमार सिंह चौहान के निधन से खाली हुई खंडवा लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ने की तैयारी की थी। उन्हें टिकट नहीं मिला, जिसमें कमल नाथ की भूमिका होना चर्चा में था। इधर, यादव भी कई बार कमल नाथ के फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। हिंदू महासभा के गोडसे समर्थक नेता बाबूलाल चौरसिया को नाथ ने कांग्रेस में शामिल कराया तो, यादव ने मुखर विरोध किया था। इधर, बीते दिनों यादव ने सोनिया गांधी से मुलाकात की है। यादव के करीबियों का कहना है कि उनकी राज्यसभा जाने पर चर्चा हुई है, जिसका वादा राहुल गांधी ने 2018 में तब किया था, जब यादव को बुधनी में शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मैदान में उतारा गया था। इस वादे के आधार पर यादव राज्यसभा जाने के लिए दबाव बना रहे हैं।

कमल नाथ पर अजय सिंह को राज्यसभा भेजने का दबाव

अजय सिंह को भी राज्यसभा भेजने का दबाव कमल नाथ पर बताया जा रहा है। सिंह 2018 में चुरहट विधानसभा सीट और 2019 में सीधी लोकसभा सीट से चुनाव हार गए थे। सिंह का विंध्य क्षेत्र में प्रभाव माना जाता है। राज्यसभा न भेजे जाने की दशा में 2023 के विधानसभा चुनाव में उनकी नाराजगी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकती है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस को विंध्य से बेहतर परिणाम मिले थे। ऐसी दावेदारियों में बीच का रास्ता निकालते हुए कमल नाथ चाहेंगे कि यथास्थिति बनी रहे और विवेक तन्खा ही फिर से राज्यसभा भेजे जाएं। अब कमल नाथ के सामने संकट है कि वे तन्खा को वापस राज्यसभा में भेजते हैं तो अरुण यादव भी सिंधिया की राह पकड़ सकते हैं। यादव पर दाव लगाएं तो तन्खा और अजय सिंह जैसे कद्दावर नेताओं का भारी विरोध कांग्रेस को झेलना पड़ेगा। कांग्रेस मौजूदा दौर में तन्खा जैसे कद्दावर नेता और कानूनविद् को नाराज करने की स्थिति में नहीं है। तन्खा कांग्रेस के जी 23 समूह के भी सदस्य हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश से जून में राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो रही हैं। इनमें दो भाजपा के एमजे अकबर और सम्पतिया उईके भी शामिल हैं।

आलाकमान करता है प्रत्याशी का चयन

राज्यसभा में कांग्रेस प्रत्याशी का चयन हमेशा आलाकमान करता है, वह जो भी निर्णय लेगा, उसे हर नेता मान्य करेगा, क्योंकि सिंधिया के समान महत्वाकांक्षी नेता इनमें से कोई भी नहीं है।