तीनों निगमों के एकीकरण से घबराए निगम कर्मचारी, निकालना शुरू किया प्रोविडेंट फंड का पैसा, बढ़ रही आवेदनों की संख्या

 

एकीकरण के बाद बिगड़ न जाए निगम की आर्थिक स्थिति, जीपीएफ की रकम दूसरी जगह खपाने में दिखा रहे रुचि।

तीन वर्ष की तुलना में दक्षिणी निगम में जीपीएफ निकालने के लिए इस वर्ष सर्वाधिक आवेदन हुए हैं।दरअसल उत्तरी और पूर्वी निगम में वेतन की दिक्कत हैं। इतना ही नहीं सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को जीपीएफ लेने के लिए निगम के दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं।

नई दिल्ली surender Aggarwal। राजधानी के तीनों नगर निगमों (उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी) के एकीकरण की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए लोकसभा से दिल्ली नगर निगम संशोधन विधेयक-2022 भी पारित हो चुका है। जब से निगम के एकीकरण की बात सामने आई है, उत्तरी और पूर्वी निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों में वेतन और पेंशन संबंधी समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है, लेकिन दक्षिणी निगम के कर्मचारी और अधिकारी आर्थिक स्थिति बिगड़ने की आशंका से भयभीत हैं। यही वजह है कि दक्षिणी निगम में जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) निकालने के आवेदकों की संख्या बढ़ गई है।

पिछले तीन वर्ष की तुलना में दक्षिणी निगम में जीपीएफ निकालने के लिए इस वर्ष सर्वाधिक आवेदन हुए हैं।दरअसल, उत्तरी और पूर्वी निगम में वेतन की दिक्कत हैं। इतना ही नहीं, सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को जीपीएफ लेने के लिए निगम के दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसका बड़ा कारण निगम की खराब आर्थिक स्थिति है।

उत्तरी निगम में जीपीएफ की 500 करोड़ से ज्यादा राशि का उपयोग निगम ने विभिन्न मदों में कर लिया है जिससे यह दिक्कत हुई है। ऐसे में दक्षिणी निगम के कर्मचारियों को डर है कि कहीं निगम एकीकरण के बाद उनके साथ जीपीएफ को लेकर दिक्कत न हो जाए। हालांकि, वर्तमान में निगमायुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि जो भी कर्मी सेवानिवृत हो, उन्हें सेवानिवृत्ति के आखिरी दिन सारी राशि चेक से उपलब्ध करा दी जाए। इसके बावजूद लोगों में कई आशंकाएं हैं।

यही वजह है कि वर्ष 2019-20 में जीपीएफ निकालने के लिए मार्च माह में जहां 61 आवेदन आए थे, वह वर्ष 2020-21 में बढ़कर 105 हो गई थी। जबकि, वर्ष 2021-22 में यह बढ़कर 123 हो गई है। इसमें से महज एक सप्ताह में 36 आवेदन आए हैं। दक्षिणी निगम के एक कर्मी ने बताया कि तीनों निगमों की तुलना में दक्षिणी निगम की आर्थिक स्थिति अच्छी है। ऐसे में तीनों निगम जब एक हो जाएंगे तो संभवत: यहां का फंड भी अन्य दो निगमों के कर्मियों के वेतन और पेंशन में उपयोग किया जाएगा।ऐसे में उम्मीद तो हैं कि स्थिति बेहतर होगी, लेकिन आशंका यह भी है कि कहीं हमारी स्थिति अन्य दोनों निगमों की तरह न हो जाए। इसलिए जीपीएफ की रकम निकालकर दूसरी जगह निवेश करने की सोची है। इसीलिए आवेदन किया है। बता दें कि कि हर वर्ष एक हजार से लेकर 1,100 कर्मियों के आवेदन प्रत्येक वर्ष जीपीएफ निकालने के आते हैं।

वित्त वर्ष कुल आवेदन मार्च माह के आवेदन

2019-20 1,144 61

2020-21 912 105

2021-22 1,169 123