तुर्कमेनिस्तान में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मध्य एशिया देशों के बीच व्यापार संबंधों के लिए चाबहार बंदरगाह की वकालत की

 

रूस-यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच तुर्कमेनिस्तान पहुंचे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद।

रूस-यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच तुर्कमेनिस्तान पहुंचे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि ईरान में भारत द्वारा बनाए गए चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार संबंधों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

अश्गाबात (तुर्कमेनिस्तान), एएनआई। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि ईरान में भारत द्वारा बनाए गए चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार संबंधों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। राष्ट्रपति कोविंद ने शनिवार को अपने तुर्कमेनिस्तान के समकक्ष गुरबांगुली बर्दीमुहामेदोव के साथ ओगुझार महल अश्गाबात में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की।

उन्होंने कहा कि ईरान में भारत द्वारा बनाए गए चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापार में सुधार के लिए किया जा सकता है। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।उन्होंने इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट एंड ट्रांजिट कॉरिडोर पर अश्गाबात समझौते के महत्व पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने बताया कि ईरान में भारत द्वारा निर्मित चाबहार बंदरगाह का उपयोग भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापार में सुधार के लिए किया जा सकता है। तुर्कमेनिस्तान के वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्रालय में वित्तीय निगरानी सेवा और भारत की वित्तीय खुफिया इकाई के बीच पहले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। जबकि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर तुर्कमेनिस्तान सरकार और भारत गणराज्य की सरकार के बीच दूसरे समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। 2022-2025 की अवधि के लिए संस्कृति और कला के क्षेत्र में तुर्कमेनिस्तान सरकार और भारत सरकार के बीच सहयोग का कार्यक्रम बनाया गया।

राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने तुर्कमेनिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार के लिए भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन के साथ-साथ 2021-22 की अवधि के लिए यूएनएससी के एक अस्थायी सदस्य के रूप में भारत की पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्‍होंने कहा कि हम अफगानिस्तान से संबंधित मुद्दों पर एक व्यापक क्षेत्रीय सहमति साझा करते हैं, जिसमें वास्तव में समावेशी सरकार का गठन, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करना, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, तत्काल मानवीय सहायता और महिलाओं, बच्चों और अन्य जातीय समूहों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का संरक्षण शामिल है। अफगानिस्तान के निकटतम पड़ोसियों के रूप में हमारे देश स्वाभाविक रूप से उस देश के विकास और उनके बाहरी प्रभावों के बारे में चिंतित हैं।

इस बीच तुर्कमेनिस्तान के खेल और युवा नीति मंत्रालय और युवा मामलों में सहयोग पर भारत गणराज्य के युवा मामले और खेल मंत्रालय के बीच तीसरे समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि मुझे विश्वास है कि भारत की वित्तीय खुफिया इकाई और तुर्कमेनिस्तान की वित्तीय निगरानी सेवा के बीच आज हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के ढांचे को मजबूत करेगा। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी व्यापारिक व्यवस्था के लिए कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि दोनों नेताओं ने आपदा प्रबंधन जैसे सहयोग के नए क्षेत्रों की भी पहचान की, जिस पर उन्होंने आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि मैंने डिजिटलकरण की दिशा में तुर्कमेनिस्तान के साथ भागीदारी करने के लिए भारत की तत्परता से अवगत कराया। अंतरिक्ष पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का एक अन्य क्षेत्र हो सकता है। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि देशों ने सदियों पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक संबंधों को साझा किया।

बातचीत के दौरान मैंने एक-दूसरे के क्षेत्र में नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के महत्व को रेखांकित किया। मुझे यकीन है कि 2022-25 की अवधि के लिए संस्कृति और कला सहयोग कार्यक्रम हस्ताक्षर किए गए, जो हमारे सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देगा। इससे पहले शुक्रवार दोपहर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के लिए शुक्रवार दोपहर तुर्कमेनिस्तान के अश्गाबात अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे।राष्ट्रपति कोविंद को उनके आगमन के तुरंत बाद तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात में गार्ड आफ आनर दिया गया। 3 अप्रैल को समाप्त होने वाली इस यात्रा के बाद राष्ट्रपति कोविंद 4-7 अप्रैल तक नीदरलैंड का दौरा करेंगे