सीएम ममता बनर्जी के बड़े-बड़े दावे की कैग की रिपोर्ट ने निकाली हवा, राज्‍य सरकार और कैग के आंकड़ों में भारी अंतर

 

राज्‍य सरकार की योजनाओं की फंडिंग और लाभार्थियों की संख्या में देखा जा रहा है भारी अंतर।

बंगाल की ममता सरकार की ओर से अपनी विभिन्न योजनाओं को लेकर जो बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं वे कैग (Comptroller and Auditor General of India) की रिपोर्ट से मेल नहीं खा रहे हैं। ममता सरकार की बजटअभिभाषण में भी ये दावे किए गए थे।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल की ममता सरकार की ओर से अपनी विभिन्न योजनाओं को लेकर जो बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वे कैग (Comptroller and Auditor General of India) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक  के आंकड़ों से मेल नहीं खा रहे हैं। ममता सरकार की ओर से पिछले दिनों पेश किए गए राज्य बजट के अभिभाषण में दावा किया गया था कि सूबे में 21 लाख महिलाओं को विधवा पेंशन मिल रहा है। 1.75 लाख महिलाएं 'लक्ष्मी भंडार' योजना से लाभान्वित हो रही हैं। 1.33 लाख लोगों को स्वास्थ्य साथी प्रकल्प के तहत सुविधाएं मिल रही हैं जबकि कन्याश्री प्रकल्प के दायरे में 77 लाख लड़कियों को लाया गया है। कैग की रिपोर्ट में लाभार्थियों की संख्या इससे काफी कम है।

राज्य सरकार हालांकि कैग की रिपोर्ट को मानने को तैयार नहीं है। कैग की रिपोर्ट में लाभार्थियों की संख्या इससे काफी कम है। ममता सरकार की तरफ से विभिन्न योजनाओं के लिए जितनी धनराशि की फंडिंग की बात कही गई है, कैग की रिपोर्ट में उसका परिमाण भी कम है। सूत्रों ने बताया कि कैग की रिपोर्ट में मुख्य रूप से ममता सरकार की आठ योजनाओं का विश्लेषण किया गया है, जिनमें कन्याश्री, लक्ष्मी भंडार, बंधु प्रकल्प, कर्म साथी जय जोहर समेत अन्य शामिल हैं। सरकार की तरफ से बंधु प्रकल्प के लिए 2,500 करोड़ रुपये आवंटित करने का दावा किया गया है जबकि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक 767 करोड़ रुपये ही इस मद में दिए गए हैं। इसी तरह जय जोहर योजना के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की बात कही गई थी जबकि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक एक रुपया भी नहीं दिया गया है। कर्म साथी योजना के लिए भी 500 करोड़ रुपये देने की बात कही गई जबकि अब तक सिर्फ 25 करोड़ रुपये ही प्रदान किए गए हैं। कमोबेश यही आंकड़ा अन्य योजनाओं के मामले में भी है।