जीवाश्म ईंधन के लिए बैंकों ने की लाखों करोड़ रुपये की फंडिंग, पैसा देने में अमेरिकी बैंक सबसे आगे

 

जीवाश्म ईंधन सेक्टर के विस्तार में किया जाए काम।

रेनफारेस्ट एक्शन नेटवर्क बैंक ट्रैक और कुछ अन्य बड़े संस्थानों ने रिपोर्ट तैयार की है। 350 लाख करोड़ फंडिंग की है दुनिया के 60 बड़े निजी बैंकों ने जीवाश्म ईंधन के क्षेत्र में 56 लाख करोड़ फंडिंग अकेले 2021 में की है विभिन्न बैंकों ने ऐसी कंपनियों में।

नई दिल्‍ली, आइएएनएस। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग ने दुनियाभर के देशों की चिंता बढ़ाई है। कई देश कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। पेट्रोलियम और कोयला जैसे जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग को सीमित करना और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को अपनाना इसी प्रयास का हिस्सा है। स्वच्छ ऊर्जा पर निवेश बढ़ाने की बातें भी कही जा रही हैं। इन सब बातों के बीच बैंकिंग आफ क्लाइमेट केओस की 13वीं वार्षिक रिपोर्ट से कई विरोधाभासी तथ्य सामने आए हैं। यह रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे दुनियाभर के बड़े बैंक आज भी जीवाश्म ईंधन के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों के लिए भारी भरकम फंडिंग कर रहे हैं।

पेरिस जलवायु समझौते के बाद भी नहीं कम हुई फंडिंग : जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए 2016 में दुनियाभर के देशों के बीच पेरिस समझौते को लेकर सहमति बनी थी। हालांकि रिपोर्ट दिखाती है कि इस समझौते से जीवाश्म ईंधन के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों की बैंक फंडिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। पिछले साल करीब 14 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग ऐसी 100 कंपनियों को की गई, जिन्होंने इसका ज्यादातर हिस्सा जीवाश्म ईंधन सेक्टर के विस्तार में किया।

पैसा देने में अमेरिकी बैंक सबसे आगे : रिपोर्ट के मुताबिक, चार अमेरिकी बैंक जेपी मार्गन चेज, सिटी, वेल्स फारगो और बैंक आफ अमेरिका इस तरह की र्फंंडग के मामले में सबसे आगे हैं। कुल फंडिंग में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी इन चार बैंकों की है। जेपी मार्गन चेज ने 2021 में रूस की ऊर्जा कंपनी गैजप्रोम की जीवाश्म ईंधन संबंधी गतिविधियों के लिए करीब 8,300 करोड़ रुपये की र्फंंडग की थी। चीन के मामले में भी ऐसा ही है। चीन भले ही अपनी औद्योगिक गतिविधियों में कार्बन उत्सर्जन कम करने की बात कर रहा है, लेकिन उसके बैंक ऐसी कंपनियों को जमकर फाइनेंस कर रहे हैं, जो जीवाश्म ईंधन के क्षेत्र में कार्यरत हैं।