गर्मी से पहाड़ पर सूखने लगा जलस्रोत का पानी, गहराया पेयजल संकट

 

हर घर नल की पाइप लाइन शोपीस बन गई है।

प्रधान का कहना है कि जल संस्थान गांव की उपेक्षा कर रहा है। पुरानी योजना से गांव को पानी मिल रहा था। उसे हर घर नल से जल योजना के तहत जोड़ दिया गया है। स्रोत में पानी कम है। जिसके कारण गांव में पेयजल संकट गहरा गया है।

 संवाददाता, बागेश्वर : कांडा के पंक्चौड़ा गांव में पेयजल की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हर घर नल की पाइप लाइन शोपीस बन गई है। लोग प्राकृतिक स्रोतों का रुख कर रहे हैं। वहां भी गर्मी बढ़ने के कारण पानी कम हो गया है। 

ग्राम पंचायत पंक्चौड़ा में जोगाबाड़ी, भनकोट, थर्प और लोहारखेत समेत चार तोक गांव भी आते हैं। इन गांवों में 150 परिवार रहते हैं और जनसंख्या दो हजार से भी अधिक है। हर घर नल से जल योजना के तहत एक वर्ष पूर्व पुरानी पेयजल योजना से पाइप लाइन बिछा दी गई। नल गांव तक पहुंच गए और टोंटी भी लगा दी गई। काम पूरा होने के छह माह बाद भी नलों में पानी नहीं आया है।

योजना के तहत 32 परिवारों को कनेक्शन भी दिए गए हैं। लक्सूना पेयजल योजना से ग्रामीणों को केवल एक घंटे पानी मिलता है। वह भी कई घरों तक नहीं पहुंच पाता है। कई स्टैंप पोस्ट पिछले छह माह से शोपीस बने हुए हैं। गांवों में लगभग 12 स्थानों पर स्टैंप पोस्ट हैं। गांव के संतोष सिंह माजिला, रतन सिंह माजिला, रघुवीर सिंह, प्रकाश सिंह, लक्ष्मण सिंह नगरकोटी, दीवान सिंह आदि ने बताया कि गांव में एक नौला है। जिस पर रोजना भीड़ रहती है। लोटे से पानी भरते हैं और वह भी सूखने के कगार पर है।

ग्राम प्रधान मुन्नी देवी का कहना है कि जल संस्थान गांव की उपेक्षा कर रहा है। पुरानी योजना से गांव को पानी मिल रहा था। उसे हर घर नल से जल योजना के तहत जोड़ दिया गया है। स्रोत में पानी कम है। जिसके कारण गांव में पेयजल संकट गहरा गया है।

जल संस्थान के ईई चंदन सिंह देवड़ी का कहना है कि हर घर नल योजना में प्राथमिक चरण का काम हो गया है। द्वितीय चरण का होना है। उसके बाद ग्रामीणों को भरपूर पानी मिलेगा।