केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद सीजन को 31 मई तक बढ़ाया, पीयूष गोयल ने ट्वीट कर दी जानकारी

 

केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद सीजन को 31 मई 2022 तक बढ़ा दिया है।

केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद सीजन को 31 मई 2022 तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर ल‍िखा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी किसान को असुविधा न हो मोदी सरकार ने गेहूं खरीद सीजन को 31 मई 2022 तक बढ़ा दिया है।

नई दिल्‍ली, एएनआइ। केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद सीजन को 31 मई 2022 तक बढ़ा दिया है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर दी। उन्‍होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी गेहूं किसान को असुविधा न हो, मोदी सरकार ने गेहूं खरीद सीजन को 31 मई 2022 तक बढ़ा दिया है। हम कृषि समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इससे पहले महंगाई के दबाव में गेहूं निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि निर्यात प्रतिबंध की अधिसूचना से पहले जिन निर्यातकों ने अनुबंध कर लिया है, उन्हें गेहूं विदेश भेजने की अनुमति दी गई है। अधिसूचना में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि किसी अन्य देश की खाद्य सुरक्षा अथवा वहां की जरूरतों के मद्देनजर सरकार की अनुमति से वहां गेहूं का निर्यात किया जा सकेगा। इस तरह का निर्यात भी उस देश की सरकार के आग्रह पर निर्भर करेगा।वैश्विक बाजार का मूड भांपकर भारत ने गेहूं निर्यात से खींचा हाथ

पिछले कुछ दिनों में आटे के मूल्य में 35 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि को देखते हुए समिति के कान खड़े हो गए थे। गेहूं की पैदावार में अनुमानित कमी और निर्यात में वृद्धि को देखते हुए जिंस बाजार में गेहूं और उससे बने उत्पादों के मूल्य में तेजी का रुख होने लगा था। इस पर काबू पाना जरूरी था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय गेहूं के स्टाकिस्टों और सटोरियों के सक्रिय होने की आशंका भी बढ़ गई थी। भारतीय गेहूं का स्टाक गैर जरूरत वाले देशों में किए जाने की खबरें भी मिलने लगी थीं।

वैश्विक स्तर पर गेहूं उत्पादक बड़े देशों की रणनीति का जिक्र करते हुए वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गेहूं निर्यात को लेकर सरकार की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। सबसे पहले पड़ोसी देशों की खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा। उसके बाद उन गरीब देशों को गेहूं की आपूर्ति की जाएगी, जिनकी सरकारें गेहूं के लिए आग्रह करेंगी। ऐसे देशों को भी गेहूं का निर्यात किया जाएगा, जिनकी खाद्य सुरक्षा खतरे में होगी।