8 साल पहले हत्या करने के मामले में गवाह ने दिया ऐसा बयान, 11 लोगों को कोर्ट ने दे दी जमानत

 

बयान दिया था कि वारदात उनके सामने हुई थी।

कोर्ट में गवाही के दौरान पिता मां और भाई ने कहा कि उन्होंने किसी को विजय को पीटते या उस पर हमला करते हुए नहीं देखा। बरामद लोहे की राड की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी पुलिस के दावे के अनुसार नहीं आई।

नई दिल्ली, संवाददाता। आठ साल चार माह पहले हर्ष विहार इलाके के मंडोली में एक युवक की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने 11 आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। तीन मुख्य गवाह मृतक के पिता, मां और भाई ने पुलिस के केस के विपरीत कोर्ट में बयान दिया कि उन्होंने किसी को हत्या करते नहीं देखा था। इन गवाहों के अलावा पुलिस के पास आरोपितों को दोषी सिद्ध करने के लिए कोई और ठोस साक्ष्य नहीं था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नवीन गुप्ता के कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

मंडोली गली नंबर-दो में 20 दिसंबर 2013 को विजय उर्फ भारत की घर के पास ही लोहे की राड से पीट कर और चाकू मार कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक चश्मदीद गवाह मृतक के पिता कन्हैया लाल ने बयान दिया था कि सात दिसंबर 2013 को उनके बेटे विजय का एक शादी समारोह में झगड़ा हुआ था। इसके चलते ही उसकी हत्या कर दी गई। बयान दिया था कि वारदात उनके सामने हुई थी।

मां सविता और भाई विशाल का बयान भी लिया गया था। इस मामले में मुबारकपुर डबास में रहने वाली सीता देवी, उसके बेटे सागर और राहुल उर्फ साहिल, सुंदर नगरी निवासी पवन कुमार और उसके भाई किशन, गोपाल सिंह और उसका बेटा विकास, नंद नगरी निवासी पवन और उसका भाई विजय उर्फ डेनी और पूजा को आरोपित बनाया था। अलग-अलग धाराओं में इन पर वर्ष 2015 में आरोप तय हुए थे।

पुलिस ने दावा किया था कि नंद नगरी के रहने वाले आरोपित पवन के पास से हमले में इस्तेमाल लोहे की राड बरामद हुई थी। कोर्ट में गवाही के दौरान पिता, मां और भाई ने कहा कि उन्होंने किसी को विजय को पीटते या उस पर हमला करते हुए नहीं देखा। बरामद लोहे की राड की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी पुलिस के दावे के अनुसार नहीं आई। कोर्ट ने केस के विपरीत बयान देने और साक्ष्यों के अभाव में सभी 11 आरोपितों को उन आरोपों से बरी कर दिया, जो उन पर लगाए गए थे।