मानवता की मिसाल: पंजाब की महिला ASI लावारिस शवों को दिला रही मुक्ति, अब तक करवाया 2 हजार का अंतिम संस्कार

 

एक लावारिस शव का अंतिम संस्कार करतीं एएसआइ सुनीता। (फाइल फाेटाे)

पंजाब पुलिस की एक एएसआइ मानवता की मिसाल पेश कर रही है। एएसआइ सुनीता पिछले कई सालाें से लावारिस लाशाें का अंतिम संस्कार कर रही है। वह पंजाब में आतंकवाद के काले दाैर में बताैर पीएसओ भर्ती हुई थी।

 लुधियाना। मान्यता है कि मृत्यु के बाद पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार न होने पर उस व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है। आए दिन हादसों में या अन्य कारणों से बहुत से ऐसे लोगों की माैत होती है, जिनकी पहचान नहीं हो पाती है। ऐसे लोगों को भी मुक्ति मिले। इसके लिए लुधियाना की असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआइ) सुनीता 4 वर्षों से लावारिस लाशाें का अंतिम संस्कार कर रही हैं।

वह मात्र अंतिम संस्कार ही नहीं करती हैं, बल्कि उनकी अस्थियां भी विधि-विधान से विसर्जित करती हैं। इसके अलावा अंतिम अरदास भी करवाती हैं। वह यह नेक कार्य भी अपने हाथों से करती हैं। वह अब तक दो हजार के करीब शवों का अंतिम संस्कार कर उनकी अस्थियां विसर्जित कर चुकी हैं।

कोरोना काल में भी नहीं रुके हाथ

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कोरोना काल के दौरान जब लोग अपने सगों से भी दूर होने लगे थे, तब भी उन्होंने यह कार्य जारी रखा और खुद श्मशानघाट में जाकर संस्कार करती रही हैं। पंजाब पुलिस को कहीं से भी कोई लावारिस शव मिलता है तो आगे बढ़कर उसका संस्कार करती हैं। एक शव के संस्कार पर 3000 से 3500 रुपये का खर्च आता है। यह खर्च भी वह खुद वहन करती हैं। अगर कोई पुलिस मुलाजिम उन्हें पैसे दे दे तो वह भी स्वीकार कर लेती हैं।

आतंकवाद के दौर में बनी थीं एसपीओ

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आतंकवाद के काले दौर के दौरान जब कोई पंजाब पुलिस में भर्ती होने तक को तैयार नहीं था तो पुलिस विभाग ने विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की भर्ती शुरू की थी। सुनीता भी इसी दौरान 1989 में बतौर एसपीओ भर्ती हुई थीं। वह कहती हैं कि 15 दिसंबर, 1989 को जनता नगर की गली नंबर 12 में उनका सामना एक व्यापारी को लूट कर मोटरसाइकिल पर जा रहे आतंकवादियों से हो गया था। उन्होंने मोटरसाइकिल से एक आतंकी को नीचे गिरा दिया था। इसी दौरान दूसरे आतंकी ने उन्हें दो गोलियां मारी थीं, जो उनकी बाजू और पेट में लगी थीं। उन पर या उनके बच्चों पर हमला न हो जाए, इसके पुलिस ने उनके भाई शाम सुंदर को एसपीओ नियुक्त कर बच्चों का बाडीगार्ड बना दिया था। भाई शाम सुंदर की बाद में वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरनाम दास जौहर की कोठी में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में नियुक्ति हो गई थी। वर्ष 1992 में आतंकवादियों द्वारा किए गए धमाके में वह शहीद हो गया था।

पुलिस को आती थी समस्या, इसीलिए शुरू किया कामएएसआइ सुनीता इन दिनों नशा तस्करों को पकड़ने के लिए बनाए गए एंटी नार्कोटिक्स सेल में तैनात हैं। इससे पहले वह सीआइए में काम कर चुकी हैं। सुनीता कहती हैं कि वह लगातार देख रही थीं कि पंजाब पुलिस को लावारिस मिलने वाले शवों का अंतिम संस्कार करने में समस्या पेश आती है। इसीलिए उन्होंने वर्ष 2000 में इस तरह के शवों का संस्कार करने का मन बनाया। तब वह कभी-कभी लोगों की सहायता से शवों का अंतिम संस्कार करती थीं। जब वह खुद इसके काबिल हो गईं तो 2017 से यह सेवा लगातार कर रही हैं।