त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डा. माणिक साहा बैडमिंटन के बेहतरीन खिलाड़ी, खूब गाते 'माय हार्ट इज बीटिंग'

 

पटना डेंटल कालेज में पढ़ाई के दौरान डा: माणकि साहा घेरे में। सौजन्य डा: एके शर्मा।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डा. माणिक साहा का पटना से भी कनेक्शन रहा। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पटना डेंटल कालेज (पीडीसी) से की थी। छात्र जीवन से ही उनमें गजब की नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता थी। वे बैडमिंटन के बेहतरीन खिलाड़ी थे और स्पोट्स मैन स्प्रिट आजतक बरकरार है।

 संवाददाता, पटना : त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डा. माणिक साहा ने अपनी स्नातक की पढ़ाई पटना डेंटल कालेज (पीडीसी) से की थी। उनके मुख्यमंत्री बनने की सूचना मिलते ही उनके सहपाठियों, जूनियर और सीनियर के बीच उल्लास का माहौल है। डा. माणिक साहा के एक वर्ष जूनियर रहे आइजीआइएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) में पीजी इंस्टीट्यूट आफ डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च के चीफ डा. एके शर्मा के अनुसार, छात्र जीवन से ही उनमें गजब की नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता थी। यदि कुछ गलत हो रहा होता था तो कोई सरोकार नहीं होने पर भी वे आगे बढ़कर उसका विरोध करते थे। वे बैडमिंटन के बेहतरीन खिलाड़ी थे और स्पोट्स मैन स्प्रिट आजतक बरकरार है। वहीं, तीन बैच सीनियर रहे पीडीसी के पूर्व प्राचार्य डा. डीके सिंह ने कहा कि वे अच्छे व ईमानदार व्यक्ति हैं। वे हमेशा कांटैक्ट में बने रहे और अपने जूनियर और सीनियर को यथोचित सम्मान देते हैं।

बंगाली के साथ हिंदी में है गजब की पकड़, खूब गाते थे गाना  

डा. एके शर्मा ने बताया कि 1978 में जब उन्होंने पटना डेंटल कालेज में नामांकन कराया तब यहां मेडिकल डेंटल एडमिशन टेस्ट होता था। वे त्रिपुरा के निवासी थे और केंद्रीय कोटे की सीट पर आए थे। बंगाली के साथ हिंदी में उनकी गजब की पढ़ाई थी। अच्छे वक्ता होने के साथ उस समय वे अमोल पालेकर की फिल्म खट्टा-मीठा का गाना- माय हार्ट इज बीटिंग कीप्स आन रिपीटिंग, आय एम वेटिंग फार यू खूब गाते थे। 1980 में पीडीसी में 25 वर्श से शिक्षकों की बहाली नहीं होने के विरोध में छात्रों ने हड़ताल की। वे केंद्रीय कोटे के छात्र थे और राज्य का मामला होने के कारण उनका इससे कोई लेना-देना नहीं था लेकिन उन्होंने इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। पटना विश्वविद्यालय के बैडमिंटन मैच में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया था। स्वैच्छिक रक्तदान हो, किसी का शादी-विवाह या अन्य कोई समारोह वे उसमें जरूर भाग लेते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि कोलकाता में उनके नाम पर एक सिनेमाघर है।

केजीएमसी में पीजी के दौरान सीनियर से हो गए जूनियर  

डा. शर्मा के अनुसार डा. माणिक साहा एक धनाढ्य परिवार से थे लेकिन उन्हें देखकर कोई इसका अंदाजा नहीं लगा सकता था। पढ़ाई को लेकर वे इतने गंभीर थे कि पढ़ाई के समय अंडरग्राउंड हो जाया करते थे। वे बिहार में पांच साल ही रहे लेकिन हमेशा संपर्क बना रहा। वर्ष 2007-08 में अपने पंजीयन के समय उनसे आखिरी मुलाकात हुई थी। 1983 में उन्होंने अपना बीडीएस पूरा किया। इसके बाद 1990 में जब वे केजीएमसी से अपना पीजी पास कर निकल रहे थे तब डा. माणिक साहा ने केंद्रीय सीट पर वहां एडमिशन लिया। उन्होंने मैक्सलोफेशियल डेंटल सर्जरी में पीजी की है।

डेंटल काउंसिल के रहे सदस्य  

डा. डीके सिंह ने बताया कि केजीएमसी लखनऊ से पीजी करने के बाद उन्होंने स्टेट मेडिकल कालेज अगरतला में शिक्षक पद पर योगदान दिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस और 2016 में बीजेपी ज्वाइन की। इसके पूर्व वे डेंटल काउंसिल आफ इंडिया के भी सदस्य रहे। त्रिपुरा में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के बाद वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे।