सरकार बदलने से भी नहीं सुधरे देश के हालात, अब खाने का तेल हुआ लोगों की पहुंच से बाहर

 

पाक में लगातार बढ़ रही महंगाई। (फाइल फोटो)

पाकिस्तान का तेल और खाद्य आयात बिल 58.98 फीसद बढ़कर लगभग 2400 करोड़ डालर हो गया है। जिससे खाने के तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं। पड़ोसी मुल्क का रुपया भी डालर के मुकाबले लगातार गिरता जा रहा है।

इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद भी हालात सुधरते नहीं दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के कारण पड़ोसी देश की अर्थव्यवस्था तेजी से गिर रही है। वहीं अप्रैल महीनों तक पाकिस्तान का तेल और खाद्य आयात बिल 58.98 फीसद बढ़कर लगभग 2400 करोड़ डालर हो गया है। जिससे खाने के तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं। पड़ोसी मुल्क में हालात ऐसे हो गए हैं कि देश का रुपया भी लगातार गिरता जा रहा है। डान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के लगभग 4400 करोड़ डालर के आयात बिल की तुलना में, अक्टूबर 2022 को समाप्त दस महीनों में देश का कुल आयात बिल 46.51 फीसद बढ़कर 6500 करोड़ डालर हो गया है।

वनस्पति घी और अन्य तेलों के दाम दौगुने बढ़े

खाद्य आयात बिल में भारी इजाफे के परिणामस्वरूप वनस्पति घी और खाना पकाने के तेल की घरेलू कीमतों में दोगुनी तेजी देखी गई है। विशेष रूप से, सोयाबीन तेल का आयात मूल्य में 101.96 फीसद की वृद्धि हुई, जबकि गेहूं का आयात पिछले वर्ष के 3.61 मिलियन टन से 19.12 फीसद घटकर 2.206 मिलियन टन रहा। पाकिस्तान में अप्रैल के महीने में शून्य गेहूं आयात हुआ है। साथ ही चाय, मसालों और दालों के आयात बिल में भी तेजी से उछाल आया है।

कई शहरों में भोजन की कमी

इस बीच खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध प्रांत में भोजन की काफी कमी हो गई है। खाद्य और ईंधन की कीमतों में वृद्धि, सूखे की स्थिति, पशुओं की बीमारियों और बेरोजगारी की समस्या ने महंगाई को चरम पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पुनरुद्धार कार्यक्रम में देरी के चलते विदेशी मुद्रा भंडार और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और भी चरमरा गई।

पेट्रोलियम उत्पादों के आयात मूल्य में 121.15 फीसद की वृद्धि

आयात बिल में तेज वृद्धि के परिणामस्वरूप पाकिस्तान में व्यापार घाटा बढ़ गया है, जिससे सरकार पर बाहरी देनदारी का दबाव भी बढ़ा है। इसके अलावा, पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों से पता चला है कि पेट्रोलियम उत्पादों के आयात मूल्य में 121.15 फीसद की वृद्धि हुई है। दूसरी ओर कच्चे तेल के आयात मूल्य में 75.34 फीसद की वृद्धि देखी गई है।

अभी और बढ़ेगा आयात बिल

डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में आयात बिल आने वाले महीनों में और बढ़ने की संभावना है क्योंकि पाकिस्तान सरकार ने रणनीतिक भंडार बनाने के लिए लगभग 40 लाख टन गेहूं और 6 लाख टन चीनी आयात करने का फैसला किया है। इस बीच, मूल्य और मात्रा दोनों के मामले में खाद्य तेल के आयात में भी लगातार वृद्धि हुई। ताड़ के तेल आयात बिल का मूल्य भी अक्टूबर 2022 को समाप्त दस महीनों में 44.64 फीसद बढ़कर 300 करोड डालर हो गया है।