डाक्टरों ने म्यूकरमाइकोसिस के इलाज का खोजा सस्ता तरीका, बीमारी के लक्षण मिलने पर रामबाण होंगी ये दवाएं

 

मरीजों को पर्याप्त मात्र में एम्फोटेरेसिन बी दवा नहीं मिल पा रही थी।

फेफड़ों में म्यूकरमाइकोसिस होने पर खांसी सीने में दर्द व सांस लेने में परेशानी होती है वहीं स्किन पर इंफेक्शन वाली जगह काली पड़ सकती है। आंखों में दर्द धुंधला दिखना पेट दर्द उल्टी या मिचली भी महसूस होती है।

नई दिल्लीsurender Aggarwal। केंद्र सरकार के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल और निजी क्षेत्र के मैक्स अस्पताल के डाक्टरों ने म्यूकरमाइकोसिस के इलाज का सस्ता तरीका खोजा है। डाक्टरों ने अपने शोध में पाया है कि म्यूकरमाइकोसिस के इलाज में एम्फोटेरेसिन बी के साथ पोटेशियम आयोडाइड (केआइ) का इस्तेमाल ज्यादा असरदार है। इससे मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं और एम्फोटेरेसिन बी का इस्तेमाल भी कम होता है। इससे इलाज का खर्च कम होगा।

डाक्टरों का दावा है कि पहली बार यह शोध किया गया है। इस वजह से अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल (अमेरिकन जर्नल आफ ओटोलरीगोलाजी) ने इस शोध को प्रकाशित किया है। पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली सहित देश भर में म्यूकरमाइकोसिस का संक्रमण फैल गया था। उस वक्त इसके इलाज के लिए एम्फोटेरेसिन बी दवा की कमी हो गई थी। लिहाजा, सरकार ने दवा वितरण के लिए कमेटी गठित की थी। फिर भी सभी मरीजों को पर्याप्त मात्र में एम्फोटेरेसिन बी दवा नहीं मिल पा रही थी।

उस दौरान आरएमएल अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के प्रोफेसर डा. कबीर सरदाना ने पोटेशियम आयोडाइड (केआइ) से एक महिला मरीज का इलाज करने के बाद दावा किया था कि यह दवा म्यूकरमाइकोसिस के इलाज में उपयोगी साबित हो सकती है जो बेहद सस्ती है। डा. सरदाना ने कहा कि म्यूकरमाइकोसिस के इलाज में पोटेशियम आयोडाइड की उपयोगिता साबित करने के लिए शोध जरूरी था। इसलिए 25 मरीजों पर शोध किया गया। मरीजों की औसत उम्र 53.48 वर्ष थी। इनमें से ज्यादातर मरीज मधुमेह (ब्लड शूगर) से पीड़ित थे। सभी मरीजों ने कोरोना के इलाज के लिए स्टेरायड इस्तेमाल किया था।

उन्होंने 15-16 दिन तक रोज कुल 86.38 मिलीग्राम स्टेरायड दवा ली थी, जो म्यूकरमाइकोसिस के फंगल संक्रमण का कारण बना। शोध में इलाज में शामिल मरीजों को एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन के साथ-साथ पोटेशियम आयोडाइड का घोल दिया गया। यह देखा गया केआइ मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार हुई। 84} (21) मरीज दो माह में ठीक हो गए। शोध में शामिल मैक्स अस्पताल के ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डा. सुमित मृग ने कहा कि सिर्फ केआई का घोल देने से म्यूकरमाइकोसिस ठीक नहीं होता, लेकिन एम्फोटेरेसिन बी के साथ दवा के प्रयोग से मरीज जल्दी ठीक हुए।

म्यूकरमाइकोसिस के लक्षण

ब्रेन म्यूकरमाइकोसिस में चेहरे पर सूजन, सिर दर्द, साइनस की दिक्कत, नाक के ऊपरी हिस्से पर काले घाव, जो जल्दी गंभीर हो जाते हैं और तेज बुखार होता है। फेफड़ों में म्यूकरमाइकोसिस होने पर खांसी, सीने में दर्द व सांस लेने में परेशानी होती है, वहीं स्किन पर इंफेक्शन वाली जगह काली पड़ सकती है। आंखों में दर्द, धुंधला दिखना, पेट दर्द, उल्टी या मिचली भी महसूस होती है।

क्या है म्यूकरमाइकोसिस

म्यूकरमाइकोसिस एक तरह का फंगल इंफेक्शन है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। इसे ब्लैक फंगस भी कहा जाता है। म्यूकरमाइकोसिस इंफेक्शन दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है। इस बीमारी में कई लोगों की आंखों की रोशनी चली जाती है, तो कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है।