क्रांतिदूत-झांसी फाइल्स' में दर्ज है बुंदेलखंड के क्रांतिदूतों की अनसुनी स्‍वाधीनता संघर्ष की दास्तान

 

पुस्तक : क्रांतिदूत (भाग-1) झांसी फाइल्स, लेखक : डा. मनीष श्रीवास्तव।

स्वाधीनता के ऐसे ही अनेक नायकों के साहस और शौर्य को लेखक डा. मनीष श्रीवास्तव ने अपनी इस पुस्तक में उकेरने का सार्थक प्रयास किया है। ऐसे ही एक साहसी वीर थे मास्टर रुद्रनारायण जिन्हें बुंदेलखंड में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का भीष्म पितामह कहा जाता है।

कन्हैया झा। आज हम देश की स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। इस स्वाधीनता को पाने में झांसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। झांसी का नाम सुनते ही सबसे पहले झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की छवि मन-मस्तिष्क में उभरती है। वर्ष 1857 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन की जो चिंगारी भड़की थी, उस आग को फैलाने में रानी लक्ष्मीबाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अंग्रेजों से डटकर लोहा लिया था। परिणामस्वरूप वर्ष 1947 में हमारा देश स्वाधीन हुआ।

निश्चित तौर पर झांसी की पहचान रानी लक्ष्मीबाई से ही व्यापक रूप से जुड़ी हुई है, परंतु इसका एक अन्य पहलू भी है, जिसके बारे में इतिहास में चर्चा कम ही की गई है। दरअसल यह ऐसे अनेक वीरों और क्रांतिकारियों की भूमि रही है, जिनका देश की स्वाधीनता में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बलिदानी चंद्रशेखर आजाद से लेकर कई अन्य क्रांतिकारियों का संबंध झांसी से रहा है। आजाद ने लंबे समय तक यहां से आजादी की मशाल को जलाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। स्वाधीनता के ऐसे ही अनेक नायकों के साहस और शौर्य को लेखक डा. मनीष श्रीवास्तव ने अपनी इस पुस्तक में उकेरने का सार्थक प्रयास किया है। ऐसे ही एक साहसी वीर थे मास्टर रुद्रनारायण, जिन्हें बुंदेलखंड में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का भीष्म पितामह कहा जाता है। उनके नेतृत्व में अनेक युवा क्रांतिकारियों ने स्वाधीनता के संघर्ष में योगदान दिया, जिसका इस पुस्तक में उल्लेख किया गया है।

लेखक का यह प्रयास है कि बुंदेलखंड से जुड़े स्वाधीनता के सभी क्रांतिदूतों की अनसुनी दास्तान को सामने लाया जाए। इसके लिए वह इस पुस्तक के बाद इसके अन्य भाग (खंड) भी लिख रहे हैैं, जिसमें उन क्रांतिवीरों का भी उल्लेख किया जाएगा, जो किसी न किसी कालखंड में झांसी से जुड़े रहे या फिर कुछ समय के लिए ही सही, उन्होंने अपनी कर्मभूमि झांसी को बनाया था। स्वाधीनता के इतिहास की समझ को बढ़ाने में यह पुस्तक उपयोगी साबित हो सकती है।

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पुस्तक : क्रांतिदूत (भाग-1) झांसी फाइल्स

लेखक : डा. मनीष श्रीवास्तव

प्रकाशक : सर्व भाषा ट्रस्ट

मूल्य : 150 रुपये