गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी इमारत, बचने का नहीं मिला रास्ता; देखिए भयावह हादसे की दर्दनाक तस्वीरें

 

भयावह हादसे की दर्दनाक तस्वीरें: गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी इमारत, बचने का नहीं मिला रास्ता

Delhi Mundka Fire Updates राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मुंडका इलाके में शुक्रवार शाम एक व्यवसायिक इमारत में भीषण आग लग गई। इस हादसे में कम से कम 27 लोगों के मरने की सूचना है। वहीं कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

नई दिल्ली, संवाददाता। मुंडका में रोहतक रोड के किनारे जिस इमारत में आग लगी, वहां कोफे इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड का कार्यालय था। यहां राउटर व सीसीटीवी कैमरे का निर्माण होता था। इस इमारत में भूतल के उपर चार तल उपर बने हैं। भूतल पर जहां कंपनी का कार्यालय था, वहीं इसके उपरी तीन तलों का इस्तेमाल स्टोरेज व निर्माण कार्यों के लिए किया जाता था। दूसरे तल पर बैठकें भी आयोजित की जाती थी। सबसे उपर वाले तल पर एक परिवार रहता था।

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इमारत में प्रवेश के लिए रोहतक रोड की ओर से प्रवेश द्वार बना था। इसी का इस्तेमाल निकास में भी किया जाता था। शुक्रवार को यहां कंपनी के कर्मियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में हिस्सा लेने न सिर्फ यहां काम करने वाले लोग बल्कि कई बाहरी लोग भी जुटे थे। आग जब लगी थी तब इमारत में करीब 150 लोग मौजूद थे।

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स्थानीय व्यक्तियों ने बताया कि साढ़े चार बजे इमारत की पहली मंजिल में आग लगी, जिसने पहली मंजिल को चपेट में ले लिया। यहां से निकले आग व धुएं ने सीढ़ी घर के रास्तेधीरे धीरे उपरी तलों को चपेट में लेना शुरू किया। लेकिन दरवाजा बंद रहने के कारण उपरी तलों पर रहने वाले लोगों को आग व धुएं के इस प्रकोप के बारे में पता नहीं चल पा रहा था।

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पुलिस सूत्रों का कहना है कि सबसे उपरी तल पर जो परिवार रहता है, उसने जब सीढ़ी घर से धुएं को निकलता पाया तो वह सुरक्षित तरीके से इमारत से बाहर निकल गया। लेकिन उसने सीढ़ी घर का दरवाजा बंद कर दिया।

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इधर जब निचले तलों पर मौजूद लोगों को घुटन महसूस होने लगी तो सभी बाहर की ओर निकलने का प्रयास करने लगे। लेकिन तब तक धुएं ने पूरी इमारत को चपेट में ले लिया था। इमारत के सामने के हिस्से पर शीशे की परत चढ़ी होने के कारण अंदर का धुआं बाहर नहीं निकल पा रहा था।

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धुआं बाहर नहीं निकल पाने के कारण पूरी इमारत गैस चैंबर में तब्दील होती चली गई। रही सही कसर आग ने पूरी कर दी। हादसे में मरने वालों को एम्बुलेंस के जरिए संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया। उधर आसपास मौजूद लोगों को जब आग लगने की जानकारी हुई तो तत्काल पुलिस को घटना से अवगत कराया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने स्वयं ही बचाव कार्य की कमान संभाल ली।

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लोगों ने सीढ़ियों का इंतजाम कर इमारत के बाहरी हिस्से से शीशे की परत को तोड़ना शुरू किया ताकि धुआं बाहर निकल सके। लेकिन लोग सीमित स्तर पर ही ऐसा कर पाए। कुछ लोगों ने रस्सी का इंतजाम किया और लोगों को रस्सी के सहारे नीचे उतारा। वहीं हादसे के वक्त नीचे मौजूद लोगों ने अंदर फंसे लोगों को कहा कि वे थोड़ी हिम्मत दिखाएं और नीचे कूद जाएं। लोगों ने चादर का भी इंतजाम किया था, लेकिन कुछ ही लोग हिम्मत दिखा सके। अधिकांश लोग अंदर फंसे ही रह गए।

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वहीं मुंडका आग हादसे में लापता स्वजन को खोजने आए लोग संजय गांधी अस्पताल में रोते-बिलखते नजर आए।