भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत, स्वदेशी नौसेना एंटी-शिप मिसाइल ने परीक्षण में लगाया सटीक निशाना

 

भारतीय नौसेना ने हेलीकाप्टर एंटी शिप मिसाइल की सफलतापूर्वक की पहली फायरिंग (एएनआइ)

भारतीय नौसेना को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. 18 मई को नौसेना ने DRDO के सहयोग से आईटीआर बालासोर ओडिशा में सीकिंग 42 बी हेलीकॉप्टर से पहली स्वदेशी रूप से विकसित नौसेना एंटी शिप मिसाइल की पहली फायरिंग सफलतापूर्वक की।

नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारतीय नौसेना को 18 मई यानी बुधवार को बड़ी कामयाबी मिली। नौसेना ने  डीआरडीओ के सहयोग से आईटीआर बालासोर, ओडिशा में सीकिंग 42 बी हेलीकाप्टर से पहली स्वदेशी रूप से विकसित नौसेना एंटी-शिप मिसाइल की पहली फायरिंग सफलतापूर्वक की।

बता दें, भारतीय नौसेना आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को स्वदेश निर्मित दो युद्धपोतों 'सूरत' और 'उदयगिरी' को मुंबई के मझगांव डाक्स में लान्च किया था। इस कार्यक्रम के शुभारंभ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोविड और यूक्रेन में चल रहे उथल पुथल के बीच इन विध्वंसकों का निर्माण व शुभारंभ हमारी समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है।

मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) के मुताबिक, ऐसा पहली बार हुआ है कि देश में ही बने दो युद्धपोतों को एक साथ लान्च किया गया है। एमडीएल एक प्रमुख जहाज और पनडुब्बी निर्माण रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।

'सूरत' प्रोजेक्ट 15B डिस्ट्रायर्स का चौथा जहाज है, जो P15A (कोलकाता क्लास) डिस्ट्रायर्स के एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत करता है। इसका नाम गुजरात की वाणिज्यिक राजधानी और मुंबई के बाद पश्चिमी भारत का दूसरा सबसे बड़ा वाणिज्यिक केंद्र सूरत के नाम पर रखा गया है।

'सूरत' वारशिप का वजन 7400 टन और लंबाई 163 मीटर है। आईएनएस सूरत की स्पीड 56 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसमें रडार को चकमा देने की प्रणाली भी है। इस वारशिप को ब्लाक निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है।

उदयगिरि वारशिप आधुनिक सुविधाओं और उन्नत हथियारों से लैस है। यह उन्नत हथियार, सेंसर और प्लेटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम से सुसज्जित है। 'उदयगिरि' पूर्ववर्ती 'उदयगिरि', लिएंडर क्लास एएसडब्ल्यू फ्रिगेट का एडवांस वर्जन है। 18 फरवरी 1976 से 24 अगस्त 2007 तक इसने तीन दशकों में देश के लिए अपनी शानदार सेवा में कई चुनौतीपूर्ण आपरेशन का सामना किया। P17A कार्यक्रम के तहत, एमडीएल में 04 और जीआरएसई में 03 के साथ कुल सात जहाज निर्माणाधीन हैं।