चेन को देख बेटे ने कहा यही है मेरी मां, कड़ा देखकर बहन बोली चला गया भाई, अपनों को ऐसे पहचान पा रहे लोग

 

मुंडका में चार मंजिला इमारत में लगी आग के बाद संजय गांधी अस्पताल में 27 शव रखे हुए हैं।

अस्पताल से आ रहीं रोने-बिलखने की आवाजों की वजह से अस्पताल के बाहर भी लोगों की भीड़ जुटने लगी। अस्पताल में हालात ये थे कि मोहिनी पाल दृष्टि यशोदा रंजू देवी तान्या विशाल की पहचान होने के बाद इनके स्वजन बेसुध हो गए।

नई दिल्ली surender Aggarwal,मुंडका में चार मंजिला इमारत में लगी आग के बाद संजय गांधी अस्पताल में 27 शव रखे हुए हैं। इसमें ज्यादातर कंकाल बन चुके हैं। इसकी वजह से शव की पहचान कर पाना स्वजन के लिए भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में जिन शव से आभूषण मिले हैं, उनके जरिये लोग अपनों की पहचान कर रहे हैं। शनिवार को अस्पताल पहुंचे लोगों में किसी ने चेन के जरिये अपनी मां को पहचाना ताकि किसी ने अंगूठी और कंगन के जरिये अपने भाई और बहन की पहचान कर उनके निधन की पुष्टि की।

दरअसल, अग्निकांड के बाद लापता और मारे गए लोगों के स्वजन शुक्रवार रातभर पुलिस थानों, अस्पतालों व मुंडका के चक्कर लगाते रहे। शनिवार सुबह जब स्वजन मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी अस्पताल पहुंचे तो इमारत से लाए गए शवों की शिनाख्त करवाने के लिए उन्हें शवगृह ले जाया गया। इनमें ज्यादातर महिलाएं ही थीं। आग से शव पूरी तरह झुलस गए हैं। झुलसने के बाद बचे कंकालों में से अपनों की पहचान करना उनके लिए काफी मुश्किल था।

मामा ने पहचाना दृष्टि के अंगूठे का छल्ला

दृष्टि की उनके मामा पूरन व भाई विजय ने शिनाख्त की। अंगूठे में पहने छल्ले, गले के लोकेट व पेंट से दृष्टि की पहचान की। मामा तिलकराज ने बताया कि दृष्टि का एक हाथ जल नहीं पाया था। शनिवार शाम को दृष्टि का अंतिम संस्कार नांगलोई स्थित श्मशान भूमि पर किया गया। दृष्टि की मामी संगीता उर्फ पूजा भी उसी इमारत में फंस गई थीं। संगीता रस्सी पकड़कर नीचे कूद गई थीं, लेकिन पूजा नहीं कूद पाई थीं।

कंगन से हुई पहचान

मोहिनी की शिनाख्त उनके पति विजय पाल ने कंगन व टूटे नाखून से की। स्वजन ने बताया कि मोहिनी सेल्स मैनेजर थीं व उनके पति विजयपाल इंडिगो में इलेक्टि्रकल विभाग में कार्यरत हैं। उनके दो बच्चे हैं। स्वजन का रो रोकर बुरा हाल है।

हाथ में पहने कड़े से पहचाना

विशाल मिथलेश की शिनाख्त उनकी बड़ी बहन अंजू ने की। अंजू ने बताया कि रक्षाबंधन पर वह उनके उसी हाथ पर राखी बांधती थी जिस पर उसने कड़ा पहना हुआ था। इसके अलावा विशाल की अंगूठी से भी शिनाख्त की गई। विशाल की चार बड़ी बहनें व एक छोटा भाई है। वह रानी खेड़ा के भाग्य विहार में परिवार के साथ रहते थे। यहां उन्हें करीब दस हजार रुपये वेतन मिलता था।

पत्नी की अंगूठी से की पहचान

भाग्य विहार की रंजू देवी की शिनाख्त उनके पति संतोष ने अंगूठी व कंगन देखकर की। संतोष ने बताया कि परिवार में तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। बच्चे मां-मां पुकार रहे हैं। अब उनको कैसे बताएं कि मां नहीं रही।

गले में पहनी चेन से की मां की पहचान

यशोदा ने भाग्य विहार की काफी महिलाओं को यहां पर नौकरी पर लगाया था। उनके बेटे ने उनकी चेन देखकर पहचाना। रिंकी ने बताया कि उनकी मां की शिनाख्त उनके भाई ने की। उनकी मां की चेन कई बार वह और कई बार उनका भाई पहनते थे।अस्पताल में हर किसी की नम दिखीं आंखें संजय गांधी अस्पताल का माहौल शनिवार को बेहद गमगीन था।

अपनों को खोने के गम में कोई सुध-बुध खो चुका था तो कोई अपनों को तलाशते-तलाशते बदहवास हो चुका था। इन हालातों को देखकर अस्पताल में पहुंचे मरीजों के तीमारदार भी आंसू नहीं रोक पा रहे थे। अस्पताल से आ रहीं रोने-बिलखने की आवाजों की वजह से अस्पताल के बाहर भी लोगों की भीड़ जुटने लगी, हालांकि पुलिस ने उन्हें रुकने नहीं दे रहे थे। अस्पताल में हालात ये थे कि मोहिनी पाल, दृष्टि, यशोदा, रंजू देवी, तान्या, विशाल की पहचान होने के बाद इनके स्वजन बेसुध हो गए। आसपास के लोगों ने मुंह पर पानी डालकर किसी तरह उन्हें संभाला और अस्पताल से बाहर ले गए।