दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- समय से फ्लैट देने में वादाखिलाफी पर प्रभावित होता है पूरा रियल एस्टेट क्षेत्र

 

पूरा भुगतान लेने के बाद भी 26 प्लैट का कब्जा नहीं देने को लेकर दर्ज कराई थी शिकायत

नोएडा प्राधिकरण की बगैर मंजूरी के नोएडा सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली सिलिकान सिटी में 26 फ्लैट का पूरा भुगतान लेने के बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं देने के मामले में आरोपित अजय कुमार की जमानत याचिका खाचिका करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की।

नई दिल्लीA.k.Aggarwal । नोएडा प्राधिकरण की बगैर मंजूरी के नोएडा सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली सिलिकान सिटी में 26 फ्लैट का पूरा भुगतान लेने के बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं देने के मामले में आरोपित अजय कुमार की जमानत याचिका खाचिका करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की कि समय से फ्लैट देने में वादाखिलाफी से पूरा रियल एस्टेट क्षेत्र प्रभावित होता है।

प्रभावित होती है रियल एस्टेट की अर्थव्यवस्था

न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ ने कहा इसके कारण निवेशक और घर खरीदार ठगे जाते हैं और रियल एस्टेट की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। जमानत मिलने पर याचिकाकर्ता के जमानत जंप करने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में जमानत नहीं दी जा सकती है।

साजिश रचकर बेचे गए फ्लैट

पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के अनुसार आम्रपाली सिलिकान सिटी के टावर जी-एक को नोएडा प्राधिकरण से मंजूरी नहीं मिली थी और आरोपितों ने आपराधिक साजिश रचकर शिकायकर्ता को 26 फ्लैट बेचे थे। जांच के अनुसार अजय कुमार कंपनी के बैंक अकाउंट में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होने के साथ ही अल्ट्रा होम कन्सट्रक्शन में एक निदेशक व हितधारक था। उसने मून बिल्डटेक प्राइवेट के पक्ष में सुनिश्चित रिटर्न और मूल राशि के चेक पर हस्ताक्षर किए थे।

नियमित जमानत की मांग

ऐसे में यह मानना ​​मुश्किल है कि याचिकाकर्ता मून बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के निवेश और टावर जी -1 में 26 फ्लैटों का आवंटन की दिन-प्रतिदिन की जानकारी से अनजान था, जिसे नोएडा प्राधिकरण द्वारा कभी भी मंजूरी नहीं दी गई थी। जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि बिना मंजूरी के उक्त प्रोजेक्ट को बेचा गया।इतना ही नहीं 26 फ्लैट का पूरा भुगतान करने के बाद भी एक भी फ्लैट का निष्पादन नहीं हुआ।वहीं, नियमित जमानत की मांग करते हुए याचिकाकर्ता अजय कुमार ने दलील दी कि पूरा मामला उसके बजाए एक सह-आरोपित और चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ दर्ज हुआ था।उसने यह भी कहा कि जब शिकायतकर्ता ने मामला दर्ज कराया था तब वह कंपनी में डायरेक्टर नहीं थे। अजय ने कहा कि वे तीन साल दो महीने से जेल में हैं और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना नहीं है।

यह है मामला

शिकायतकर्ता अनुभव जैन की शिकायत के अनुसार नोएडा सेक्टर-76 में आम्रपाली सिलीकान सिटी के निदेशक व अधिकारी सितंबर 2011 में मिले थे। उन्होंने सितंबर 2013 तक 26 फ्लैट का कब्जा देने का वादा किया था। इसके तहत उन्होंने 26 फ्लैट के लिए 6.60 करोड़ रुपये का फाइनल भुगतान भी नवंबर 2011 में कर दिया।जबकि, न रुपये वापस किया गया और न ही फ्लैट का कब्जा मिला।