किस बात पर कुमार विश्वास बोले, ये ड्राफ्ट में सुरक्षित रखा ट्वीट हर बार मत कॉपी पेस्ट करिए महामहिम

 

कवि कुमार विश्वास ने कश्मीर के हालात पर एक ट्वीट किया है।

लगातार हो रही टारगेट किलिंग से घाटी में तैनात हिंदू कर्मचारियों और अन्य अल्पसंख्यकों में भय और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो रही है इसलिए वे मांग कर रहे हैं कि कश्मीर में सुरक्षा हालात पूरी तरह सामान्य होने तक उन्हें जम्मू संभाग में स्थानांतरण कर दिया जाए।

नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। इन दिनों कश्मीर में आतंकी घटनाएं फिर से होने लगी है। आतंकी या उनके समर्थक कश्मीरी पंडितों को चुन-चुनकर मार रहे हैं उनकी हत्या कर रहे हैं। बीते दिनों कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों द्वारा दलित अध्यापिका रजनी बाला की हत्या के बाद घाटी में मौजूद हिंदुओं के बीच जो खौफ पैदा हुआ, उसे इसी जिले में एक बैंक मैनेजर विजय कुमार की टारगेट किलिंग ने और बढ़ा दिया है। वह मूलत: राजस्थान के थे।

उनकी हत्या से पहले बडग़ाम जिले में कश्मीरी राहुल भट्ट की हत्या के बाद हिंदू कर्मचारियों ने कश्मीर के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया था और यह कहा था कि उनके सामने फिर से पलायन के अलावा और कोई राह नहीं दिखती। चूंकि लगातार हो रही टारगेट किलिंग से घाटी में तैनात हिंदू कर्मचारियों और अन्य अल्पसंख्यकों में भय और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो रही है, इसलिए वे मांग कर रहे हैं कि कश्मीर में सुरक्षा हालात पूरी तरह सामान्य होने तक उन्हें जम्मू संभाग में स्थानांतरण कर दिया जाए। आतंकियों ने पिछले 20 दिनों में सात लोगों को लक्ष्य बनाकर मौत के घाट उतारा है। यह आंकड़ा चिंतित करने वाला है।

इन घटनाओं को देखते हुए कवि कुमार विश्वास ने भी अपने इंटरनेट एकाउंट से ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि कब तक मौन रहोगे विदुरो ?

कब अपने लब खोलोगे ?

जब सर ही कट जायेगा तो,

किस मुहँ से क्या बोलोगे ?

उन्होंने ये ट्वीट पहले से ट्वीट किए गए एक ट्वीट के सापेक्ष में किया है। पहले वाले ट्वीट में लिखा है कि ये ड्राफ़्ट में सुरक्षित रखा ट्वीट हरबार मत कॉपी पेस्ट करिए महामहिम🙏😖सेना-प्रशासन-केंद्र-राज्य-अर्धसैनिक बल सब तो आपके पास है,ढूँढ-ढूँढकर वो सज़ा देना सुनिश्चित करिए कि इनके सरहद पार बैठे फूफाओं और देश में जमे जीजाओं दोनों की रूह काँप जाएँ🤬जनमत मिला है तो अब जनमन समझिए प्रभु।

घाटी में कश्मीरी हिंदुओं के साथ देश के दूसरे हिस्सों के गैर कश्मीरियों की टारगेट किलिंग को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने घोषणा की है कि कश्मीर में तैनात अल्पसंख्यक समुदाय के सभी कर्मचारियों को छह जून तक सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। अभी तक लगभग साढ़े चार हजार कश्मीरी पंडितों को प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत सरकारी नौकरी दी गई है। इनमें से सभी कश्मीर में तैनात हैं। आतंकी बार-बार इस समुदाय को निशाना बनाकर उन्हें घाटी से पलायन करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। आतंकी संगठन लगातार वीडियो जारी कर कश्मीरी हिंदुओं और देश के दूसरे हिस्से के कर्मचारियों और अन्य लोगों को कश्मीर छोडऩे के फतवे जारी कर रहे हैं।