होटलों में सेमिनार आयोजित कर आरोपित लोगों को बनाते थे शिकार. सात साल में हजारों से ठगी, पढ़िए ठगों की कारस्तानी

 

सात साल में हजारों लोगों से की ठगी, दो आरोपित अभी फरार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आशीष मलिक अपने दो अन्य साथियों संदीप कौशिक और सुनील सिंह चौहान के साथ मिलकर सात वर्षो में 60 करोड़ रुपये से भी अधिक की ठगी कर चुका है।

नई दिल्ली, संवाददाता। रूस की तेल कंपनी में निवेश करने पर 20 प्रतिशत अधिक का मुनाफा देने का झांसा देकर हजारों लोगों से ठगी करने के मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आशीष मलिक अपने दो अन्य साथियों संदीप कौशिक और सुनील सिंह चौहान के साथ मिलकर सात वर्षो में 60 करोड़ रुपये से भी अधिक की ठगी कर चुका है। इस मामले में फिलहाल दो आरोपित देश से बाहर हैं। उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी हो चुका है।

संयुक्त पुलिस आयुक्त छाया शर्मा के मुताबिक दिसंबर 2019 में कोर्ट के आदेश पर आर्थिक अपराध शाखा में इस मामले को लेकर एफआइआर दर्ज की गई थी। पीडि़त आनंद लक्ष्मण की शिकायत के अनुसार उन्होंने मई 2016 में रूसी तेल कंपनी में निवेश का एक विज्ञापन देखा था। एक होटल में सेमिनार का आयोजन हुआ था जिसमें बताया गया कि कंपनी में निवेश करने पर प्रति माह 20 प्रतिशत रिटर्न दिया जाएगा। सेमिनार में बताया गया कि जैकपाटमेनिया कंपनी के प्रतिनिधियों ने आश्वास्त किया कि इन सभी रुपयों को रूसी कंपनी में निवेश किया जाएगा।

पीडि़त ने 89 लाख रुपये जमा कर दिए, लेकिन दो माह बाद ही रिटर्न मिलना बंद हो गया। जांच के क्रम में ठगी में संदीप कौशिक, आशीष मलिक और सुनील सिंह चौहान के नाम सामने आए। तीनों आरोपितों ने खुद को रूस की जैकपाटमेनिया कंपनी का निदेशक बताया और कहा कि उनकी तेल की कंपनी की भारतीय शाखा है। जांच में सामने आया कि यह कंपनी फर्जी तरीके से बड़ी संख्या में लोगों से ठगी में लिप्त है। डीसीपी एमआइ हैदर की देखरेख में गठित टीम ने आरोपित आशीष मलिक को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित ने हरियाणा के निजी संस्थान से बीटेक और एमबीए किया हुआ है।

बिटक्वाइन में बदली रकम

जांच में सामने आया कि आरोपित आशीष का काम था कि वह लोगों को तकनीकी पहलु समझाए और सेमिनार में मौजूद लोगों के सवालों का जवाब दे। यह गिरोह लोगों से रुपये लेकर बैंक खाते में जमाकर उन्हें विदेशों में क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटक्वाइन आदि में बदल कर निकाल लेता था। पुलिस इस गिरोह के बैंक खातों की जांच कर रही है।