भीषण बाढ़ के लिए हो जाइए तैयार, वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को लेकर दी ये चेतावनी

 

जलवायु और भूमि परिवर्तन के कारण भविष्य में भारत में आने वाली बाढ़ का अनुमान

जलवायु परिवर्तन पर पर आई आईपीसीसी की रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि आने वाले समय में भारत और दक्षिण एशिया में मानसून की घटनाएं बढ़ने की आशंका है जबकि कम समय में ही बहुत तेज बारिश के मामले बढ़ेंगे।

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन का असर हर तरफ दिख रहा है। बढ़ती गर्मी और असमय बारिश के चलते लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि 21वीं सदी में हर महीने होने वाली औसत बारिश में 40 से 50 मिलीमीटर तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके चलते बाढ़ की घटनाएं बढ़ेंगी। आने वाले दिनों में हर साल भीषण बाढ़ का सामना करने वाले इलाकों के क्षेत्रफल में 122 फीसदी तक की बढ़ोतरी की संभावना है।

अध्ययन के मुताबिक, 21वीं सदी के अंत तक लगभग 0.071 मिलियन वर्ग किलोमीटर इलाके में जंगल काट कर इस जमीन का इस्तेमाल खेती और रहने के लिए घर बनाने के लिए किया जाएगा। इससे हालात और खराब होने की संभावना है। इस शोध में शामिल पश्चिम बंगाल के वर्धमान विश्वविद्यालय के डॉक्टर सुबोध चंद्र पाल ने बताया कि पिछले कुछ सालों में गर्मी बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र के 'जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल' (आईपीसीसी) ने भी पृथ्वी का औसत तापमान 2030 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की बात कही है। ऐसे में गर्मी बढ़ने से बारिश के पैटर्न में भी बदलाव देखा जाएगा।

पिछले कुछ समय में देश के तटीय इलाकों में कई चक्रवात दर्ज किए गए हैं। ये भी जलवायु परिवर्तन का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि हमारे शोध से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में हर महीने होने वाली औसत बारिश में बढ़ोतरी होगी। तेज और अचानक से ज्यादा बारिश होने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ेगा। जलवायु परिवर्तन के खतरे को ध्यान में रखते हुए ज्यादा से ज्यादा खाली पड़ी जगहों पर पेड़ लगाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।

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इस वजह से बढ़ेगी बाढ़

रिपोर्ट के मुताबिक इस शोध का मुख्य उद्देश्य जलवायु और भूमि परिवर्तन के कारण भविष्य में भारत में आने वाली बाढ़ का अनुमान लगाना था। इसके लिए मानव गतिविधि और उससे होने वाले कार्बन उत्सर्जन, भूमि उपयोग में बदलाव और जलवायु परिवर्तन प्राथमिक कारण है। यह अध्ययन रिमोट सेंसिंग डेटा और जीआईएस मॉडलिंग के जरिए आने वाले समय में अलग - अगल अवधि (21 वीं सदी) के उच्च-रिज़ॉल्यूशन बाढ़ संवेदनशीलता मानचित्र प्रस्तुत करता है। यह मॉडल 91.57 फीसदी सटीकता को दर्शाता है। इसका उपयोग भविष्य में बाढ़ संवेदनशीलता मॉडलिंग के लिए किया जा सकता है।

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और बिगड़ेंगे हालात

हाल ही में जलवायु परिवर्तन पर पर आई आईपीसीसी की रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि आने वाले समय में भारत और दक्षिण एशिया में मानसून की घटनाएं बढ़ने की आशंका है। जबकि कम समय में ही बहुत तेज बारिश के मामले बढ़ेंगे। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त समिति (IPCC)की छठी रिपोर्ट के मुताबिक 21वीं सदी के अंत तक दक्षिण एशियाई मानसून की बारिश में वृद्धि होगी। सूखे की घटनाएं बढ़ेंगी क्योंकि जमीन में नमी कम हो जाएगी। तापमान बढ़ने कारण पानी के वाष्प बनने की घटनाएं बढ़ेंगी जिसके कारण जमीन में नमी की मात्रा में कमी आएगी और सूखा पड़ेगा। IPCC की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के कारण 1.5 से 2 डिग्री तक तापमान बढ़ने बढ़ने का अनुमान है। भारत और दक्षिण एशिया में गर्मी के दिनों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है।