निफ्टी 21,000 तो सोना 62 हजार तक जा सकता है, रियल एस्टेट पर बढ़ती ब्याज दराें और अमेरिकी मंदी का खतरा


शेयर बाजार 2022 में उतार-चढ़ाव का शिकार रहा लेकिन नया साल बेहतर रहने की उम्मीद है। सोना भी नई ऊंचाईयां छू सकता है। रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी अच्छी संभावनाएं हैं हालांकि अमेरिका में अगर मंदी आती है तो इस पर कुछ न कुछ असर जरूर पड़ेगा।

, नई दिल्ली। अगले सप्ताह से बाजार के लिए नया साल शुरू हो जाएगा। रियल एस्टेट को छोड़ दें तो 2022 अन्य निवेश साधनों जैसे कि शेयर बाजार और सोने के लिए खास नहीं रहा। साल 2021 में निवेशकों की झोली भरने वाला शेयर बाजार 2022 में उतार-चढ़ाव का शिकार रहा। सेंसेक्स दिसंबर के अंत में लगभग उसी जगह खड़ा है, जहां जनवरी की शुरुआत में था। सोने में मामूली तेजी आई, लेकिन वह भी साल के आखिर में। रियल एस्टेट ने जरूर रिकॉर्ड बिक्री हासिल करने में सफलता हासिल की। अब नए साल में यह तस्वीर बदलने का अनुमान है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि साल 2023 में घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। निफ्टी के 19500 से लेकर 21000 अंक तक पहुंचने के अनुमान लगाए जा रहे हैं, जबकि सेंसेक्स के 64 हजार के पार पहुचंने का अनुमान है। विशेषज्ञ 24 कैरेट सोने के दाम 62 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने का अनुमान जता रहे हैं।वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी मोतीलाल ओसवाल ब्रोकिंग एन्ड डिस्ट्रीब्यूशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार की तरफ से पूंजीगत खर्च में तेज बढ़ोतरी और मजबूत उपभोक्ता मांग के चलते भारतीय कंपनियों ने 2022 में 24% की मजबूत सीएजीआर ग्रोथ दिखाई। देश में जिस तरीके से क्रेडिट ग्रोथ बढ़ रही है, उससे भी इस मजबूती का संकेत मिलता है। बीते कुछ महीनों से क्रेडिट ग्रोथ एक दशक के ऊंचे स्तर 15% पर पहुंच गई है। इस बीच इंडस्ट्री कंसॉलिडेशन के चलते उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल लंबी अवधि के औसत के 75% स्तर पर पहुंच गया। इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन सकारात्मक संकेतों के बीच चीन+1 और यूरोप+1 नीति के चलते आउटसोर्सिंग बढ़ने की गुंजाइश बढ़ी है। इसके अलावा पीएलआई और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहल की बदौलत जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान बढ़ने की संभावना है, जो अभी 15% है।

रिपोर्ट कहती है, कुल मिलाकर जहां बाकी दुनिया कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है, भारत रेगिस्तान में एक नखलिस्तान की तरह खड़ा है। यहां घरेलू निवेश भी मजबूत बना हुआ है और एफआईआई अब बिकवाल से खरीदार बन गए हैं। निफ्टी अब 1 साल आगे के 20x पी/ई पर ट्रेड कर रहा है, जो सही है। रिपोर्ट बीएफएसआई, कैपिटल गुड्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर, सीमेंट, हाउसिंग, डिफेंस और रेलवे पर दांव लगाने की बात करती है।विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्ष 2023 में संभावित मंदी, भू-राजनीतिक जोखिम और चीन में कोविड के बढ़ते मामलों से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। 2023 में आरबीआई के साथ-साथ यूएस फेड की नीतिगत दरें भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पॉलिसी रेट्स के मामले में कोई ढिलाई बाजार को रफ्तार देगी।

एक अन्य सिक्युरिटी फर्म एमके इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज मौजूदा हालात को देखते हुए अगले साल निफ्टी के 19,500 के स्तर तक पहुंचने का अनुमान जता रही है, जबकि सेंसेक्स के लिए फर्म ने 64,500 का अनुमान जताया है, बशर्ते वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पॉलिटिकल सेट-अप में कोई बड़ा बदलाव न आए।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के इंस्टीट्यूशनल रिसर्च प्रमुख संजय चावला के मुताबिक, लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें और ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक वृद्धि आने वाले 6-12 महीनों में बाजार के लिए संभावित चुनौतियां हैं। वैश्विक और घरेलू अनिश्चितताएं भी एक बाधा के रूप में कार्य कर सकती हैं। जानकार इस बात पर सहमत हैं कि डॉलर इंडेक्स की गति, संभावित वैश्विक मंदी की गहराई और आयाम, और फेड की चाल प्रमुख कारक हैं, जो नए साल में बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष 2023 में निफ्टी-50 का मुनाफा मोटे तौर पर बैंकों, ऑटो, ऑटो-एंसिलरी, तेल एवं गैस और आईटी कंपनियों से आएगा।वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी एम्प्लिफाई कैपिटल्स के पार्टनर अभिषेक भट्ट कहते हैं, इतिहास बताता है कि जब भी महंगाई घटती है तो शेयर बाजार में तेजी आती है। दुर्भाग्य से वर्तमान हालात में यह बताना सबसे कठिन है कि महंगाई में कमी कम तक आएगी। भट्ट के मुताबिक, 2023 के लिए प्रमुख आर्थिक प्रश्न यह है कि क्या केंद्रीय बैंक मंदी के बिना या कम से कम गहरी मंदी के बिना महंगाई की दर को अधिक स्वीकार्य स्तर पर लाने में सक्षम होगा। भट्ट के मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और एंसिलरी और केमिकल सेक्टर 2023 का चमकता सितारा होगा।

देश के सबसे पुराने ब्रोकरेज घरानों में शुमार प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड के एडवायजरी हेड विक्रम कासत नए साल को लेकर काफी सकारात्मक हैं। कासत के मुताबिक, भारतीय बाजार 2023 में विकास के अपने अगले चरण के लिए तैयार है। हम निफ्टी को 12 महीने के आधार पर 21,000 से ऊपर देखते हैं। हमें उम्मीद है कि मजबूत मांग और कमोडिटी की कीमतों में नरमी से कंपनियों की आय वृद्धि की गति में सुधार होगा।

रियल एस्टेट के लिए नया साल 2022 जैसा होना मुश्किल

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए साल 2022 काफी शानदार रहा। देश के सात बड़े शहरों ने करीब 3.6 लाख मकानों की बिक्री के साथ साल 2014 के 3.43 लाख मकानों की बिक्री का रिकॉर्ड तोड़ दिया। हालांकि, 2023 भी इतना अच्छा रहने के आसार कम हैं।

रियल एस्टेट एडवायजरी फर्म एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी कहते हैं, पूरे 2022 में मकानों की बिक्री उत्साहजनक रही। बिक्री की वर्तमान गति कम से कम 2023 की पहली तिमाही तक बनी रहेगी। इसके बाद यह गृहस्वामित्व की इच्छा, रेपो दर में नई वृद्धि और मकानों की कीमत बढ़ने पर निर्भर करेगी।

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पुरी के मुताबिक, 2022 में रेपो रेट में लगभग 225 आधार अंकों की बढ़ोतरी देखी गई और होम लोन की ब्याज दरों को समान रूप से बढ़ने में कोई समय नहीं लगा। अब तक इन दरों में वृद्धि का मकानों की बिक्री पर मामूली प्रभाव पड़ा है। लेकिन, यदि होम लोन की ब्याज दरें 9.5% से अधिक हो जाती हैं, तो हम हाउसिंग डिमांड में काफी कमी देखने की उम्मीद कर सकते हैं।

एक अन्य रियल एस्टेट एडवायजरी फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया के अनुसार, 2023 में मकानों की कीमत बढ़ने के मामले में बेंगलुरु शीर्ष-3 एशिया प्रशांत बाजारों में शामिल है। बेंगलुरु में आवासीय कीमत 2023 में 5% तक बढ़ने की उम्मीद है, जो प्रमुख तीन भारतीय बाजारों में सबसे अधिक है। 2023 में मुंबई की आवासीय कीमत 4% तक बढ़ने की उम्मीद है। दिल्ली में मकानों के दाम 2 से 3 फीसदी के बीच बढ़ने का अनुमान है।

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नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, भारतीय रियल एस्टेट इस दशक में और संभवतः आगे भी विकास का एक वैश्विक इंजन बना रहेगा। संरचनात्मक कारक लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां जन सांख्यिकी और बढ़ते मध्यम वर्ग से आकर्षित होकर उभरते बाजारों में अपना बेस स्थापित कर रही हैं। यह रेसिडेंशियल सेगमेंट के लिए अच्छा संकेत है।

नए साल में और बढ़ सकती है सोने की चमक

कमोडिटी एडवायजरी फर्म केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं, सोने की कीमतों का सीजन देखें तो जुलाई और अक्टूबर के महीने के बीच इसके दाम साल के शिखर पर पहुंचते हैं। प्रमुख एशियाई देशों से त्योहारी मांग और दुनिया भर में क्रिसमस और नए साल के जश्न के कारण यह होता है। 2022 में भी ऐसा हुआ, लेकिन इस साल अंतर यह है कि अक्टूबर के बाद भी कीमतों में नरमी नहीं आई। प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती अनिश्चितताओं ने पीली धातु को सपोर्ट किया।

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केडिया के मुताबिक, 2023 में केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद और फेड दरों में बढ़ोतरी से सोने की कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम सोने को एक मूल्यवान हेज बनाए रखेंगे। इसके अलावा, चीन में आर्थिक विकास में अगले साल सुधार होने की उम्मीद है, जिससे सोने की उपभोक्ता मांग को बढ़ावा मिलेगा। महंगाई में कमी, डॉलर के कमजोर होने से भी सोने को समर्थन मिल सकता है। केडिया के मुताबिक, सोना नए साल में 62 हजार के स्तर तक जा सकता है। इसे 56200, 59450, और 62000 रुपये पर रेजिस्टेंस मिलेगा, जबकि 51600, 48750 और 47000 रुपये पर मजबूत समर्थन मिलने की उम्मीद है।