जहां बिछी रहती थी बर्फ की चादर, वहां बुग्यालों से उठ रहा है धुआं, मौ म सम जानकार भी हैरान

 

Uttarakhand News: बुग्यालों से धुआं उठ रहा है।

Uttarakhand News बीते वर्षों तक जिन स्थानों पर जनवरी माह में दो से ढाई फीट तक बर्फ जमी रहती थी वहां इस समय धुआं उठ रहा है। उठ रहा धुआं पर्यावरणविदों के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है।

संवाद सूत्र, मुनस्यारी: Uttarakhand News: बीते वर्षों तक जिन स्थानों पर जनवरी माह में दो से ढाई फीट तक बर्फ जमी रहती थी और लोग स्कीइंग करते थे वहां इस समय बुग्याल जल रहे हैं। बुग्यालों से धुआं उठ रहा है।

घाटियों से लेकर चोटियों तक दिन के काफी गर्म रहने से मौसम के जानकार भी हैरान हैं। मौसम के इस रंग को देखते हुए तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। उच्च हिमालयी गांवों में भी बीते दिनों हुए हिमपात से जमी बर्फ पिघल चुकी है।हिमनगरी से चर्चित मुनस्यारी बाजार तो दूर 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित खलिया टाप के पाश्र्व के बुग्यालों में आग लगी है। जनवरी में जिस खलियाटाप में चार, पांच फीट के आसपास बर्फ रहने से चांदी सी चमक रहती थी वहां से उठ रहा धुआं पर्यावरणविदों के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है।

30 दिसंबर को हल्का हिमपात हुआ जो दूसरे दिन पिघल गया

बुग्यालों में लगी इस आग से सबसे अधिक खतरा बुग्यालों में शरण लिए कस्तूरा मृग सहित मोनाल व अन्य पशु पक्षियों के लिए बना हुआ है। बीते वर्ष 2021 में मुनस्यारी से लेकर खलिया तक छह बार हिमपात हो चुका था।इस समय युवा मुनस्यारी के निकट पातलथौड़, बलाती, बिटलीधार व खलिया में स्नो स्कीइंग का आनंद उठा रहे थे । इस वर्ष अभी बीते दिनों 30 दिसंबर को हल्का हिमपात मात्र हुआ जो दूसरे ही दिन पिघल गया था।

मुनस्यारी के खलिया टाप, हंसलिंग की तलहटी, बुई पातों के बुग्यालों में आग लगी है। आग बेशक मानवों द्वारा लगाई गई है, परंतु जहां पर बर्फ जमी रहती थी, वहां पर आग तेजी से फैल रही है।

आग पर नियंत्रण के लिए वन विभाग की टीम मौके को रवाना हो चुकी है, परंतु वर्षा और हिमपात के अभाव में बुग्यालों में सूखी घास में आग तेजी से बढ़ रही है और बुग्यालों से उठने वाला धुआं पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है।

जनवरी में बर्फीले क्षेत्र में आग लगने की तीसरी घटना

आज से पूर्व 2005 में भी मौसम का मिजाज लगभग इस वर्ष जैसा ही रहा था। तब जनवरी प्रथम सप्ताह में बर्फीले क्षेत्र के बुग्यालों में आग लगी थी। 2005 में 21 से लेकर 23 जनवरी तक जब हिमपात हुआ था। इसके बाद वर्ष 2018 में भी मौसम का रंग बदला रहा। इस वर्ष भी खलिया के बुग्यालों में आग लगी थी। तब फरवरी में जाकर हिमपात हुआ था।

दिन में चटक धूप और रात को तापमान में भारी गिरावट

शनिवार को सीमांत जिले में मौसम का जो रंग देखने को मिला उससे जनवरी में मध्य मार्च जैसे मौसम का अहसास हो रहा था। चटक धूप के चलते लोग देर तक धूप में भी नहीं बैठ पा रहे थे। घाटियों से लेकर ऊंचाई वाले स्थानों पर तापमान में बढ़ोतरी रही।

एक तरफ दिन में चटक धूप तो दिन ढलते ही हाड़तोड़ ठंड से लोग परेशान हैं। मुनस्यारी में तो रात का तापमान माइनस तीन से चार तक पहुंच रहा है। वर्षा और हिमपात नहीं होने से ठंडी हवाएं चल रही है और बर्फ से ढके रहने वाले स्थानों पर चल रही हवा के साथ धूल उड़ रही है।

बुग्यालों में लगी आग पर नियंत्रण के लिए वन कर्मियों की टीम मौके को रवाना हो चुकी है। मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया जाएगा। आग लगाने वालों का पता लगाया जाएगा।

- जगदीश बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी, मुनस्यारी

जनवरी माह में मुनस्यारी सहित आसपास के बुग्याल बर्फ से ढके रहते थे। बुग्यालों में केवल बर्फ ही बर्फ नजर आती थी। इस वर्ष सूखे जैसे हालात हो चुके हैं। दिन में चटक धूप और रात को तापमान में भारी गिरावट आ चुकी है। जिससे पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। बुग्यालों में शरण लिए पशु पक्षियों के लिए भी यह मौसम घातक है। बीते समय में भी एक दो बार जनवरी माह में बुग्यालों में आग लगी थी, परंतु इस बार मौसम का रंग अलग ही नजर आ रहा है। नमी लगभग समाप्त हो चुकी है जो वनस्पतियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।