राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘लक्ष्मण रेखा’ के दायरे में ज्ञानवापी और मथुरा मंदिर मामले में आगे बढ़ेगी विहिप

 

Gyanvapi Row: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘लक्ष्मण रेखा’ के दायरे में ज्ञानवापी और मथुरा मंदिर मामले में आगे बढ़ेगी विहिप

Gyanvapi Row विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में संतों से मार्गदर्शन लिया जाएगा। इसके साथ ही कानून के दायरे में मंदिरों की लड़ाई लड़ी जाएगी।

नई दिल्ली surender Aggarwal। ज्ञानवापी व मथुरा मामले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा खींची गई ‘लक्ष्मण रेखा’ के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ेगी। यह रास्ता कानून के साथ संविधान का होगा। हरिद्वार में 11 व 12 जून को होने वाली विहिप की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इसी दायरे में साधु-संतों का मार्गदर्शन भी लिया जाएगा।

कुछ दिन पहले तक विहिप का भी मानना था कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य पूर्ण होने से पहले तक वह किसी और मामले को हाथ में नहीं लेगी, लेकिन वाराणसी सिविल कोर्ट के आदेश पर हुई ज्ञानवापी की स्थलीय जांच में वजूखाना से शिवलिंग निकलने के मामले ने विहिप को उत्साहित कर दिया।

बता दें कि मथुरा जन्मभूमि का मामला भी कोर्ट में है। ऐसे में अंदरखाने एक और आंदोलन की बातें होने लगी थीं। इसके लिए शीर्ष स्तर पर विमर्श भी होने लगा था, लेकिन आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग के समापन पर अपने उद्बोधन में उन सभी कयासों पर न सिर्फ विराम लगा दिया है, बल्कि इस मामले में संयम बरतने का भी स्पष्ट संदेश दिया है।

नागपुर संघ मुख्यालय के नजदीक रेशिम बाग में आयोजित समापन समारोह में भागवत ने दो टूक कहा था कि हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना? अब उसका क्या विचार करना? उस वक्त जो घटित हुआ, उस इतिहास को न आज के मुसलमानों ने बनाया, न आज के हिंदुओं ने बनाया। उसे हम बदल नहीं सकते हैं।

संघ के मार्गदर्शन में राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व विहिप के हाथ में था। संघ प्रमुख का यह संदेश उसके व अन्य हिदूं संगठनों के लिए है, इसलिए विहिप के पदाधिकारी अब ज्ञानवापी व कृष्ण जन्मभूमि को लेकर उत्साहित बयानों से परहेज कर रहे हैं।

विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने दैनिक जागरण से कहा कि ज्ञानवापी का हल कानून के साथ संविधान के रास्ते से निकाला जाएगा। इसपर मार्गदर्शक मंडल की बैठक में साधु-संतों से मार्गदर्शन लिया जाएगा।