काशी धर्म परिषद की बैठक में मुस्लिम धर्म गुरुओं से जुमे के दिन शांति की अपील, अपर पुलिस आयुक्त को पत्रक सौंपा

 

काशी धर्म परिषद ने जुमे के नमाज के बाद अशांति की आशंका को लेकर अपर पुलिस आयुक्त को पत्रक सौंपा।

काशी धर्म परिषद के संतों ने महंत बालक दास के नेतृत्व में वाराणसी के अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था सुभाष चन्द्र दुबे को शुक्रवार को जुमे की नमाज के दिन शांति व्यवस्था बनाये रखने के सन्दर्भ में पत्र दिया।

वाराणसी,  संवाददाता। शुक्रवार को होने वाले जुमे की नमाज के बाद होने वाली हिंसा की आशंका को लेकर काशी धर्म परिषद ने शांति व्यवस्था की बहाली के लिए सुभाष भवन, लमही में केन्द्रीय धर्माधिकारियों की बैठक बुलायी। मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाजनीन अंसारी की अपील पर धर्म परिषद बुलाई गई। धर्म परिषद के अध्यक्ष एवं पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास जी महाराज के सम्मुख मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जिला संयोजक अफसर बाबा ने ज्ञानवापी के मुद्दे पर सच बोलने के बाद अपने ऊपर हुए हमले को लेकर पूरी घटना सुनाई।

काशी धर्म परिषद की बैठक के केन्द्रीय धर्माधिकारियों ने संयुक्त रूप से प्रस्ताव पारित किया कि मुस्लिम धर्मगुरु मुस्लिम समाज को हिंसा करने से रोकें। नमाज के बाद हाथों में पत्थर लेकर निर्दोश लोगों को मारना कहां का धर्म है। जुमे को जो भी तकरीर हो उसको रिकॉर्ड किया जाए। देवबंदी मस्जिदों और मरकजों में जो जमाती बाहर से आये हैं, उनकी पहचान की जाए।

काशी धर्म परिषद के संतों ने महंत बालक दास के नेतृत्व में अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था सुभाष चन्द्र दुबे को शुक्रवार को जुमे की नमाज के दिन शांति व्यवस्था बनाये रखने के सन्दर्भ में पत्र दिया।

इस अवसर पर महंत बालक दास जी महाराज ने कहा कि हम शुक्रवार को लेकर आशंकित हैं, इसलिए हमने मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील किया है कि मुस्लिम समाज को शांति, सद्भावना और कानून के रास्ते पर ले जायें। नमाजियों के द्वारा पथराव मुस्लिम धर्मगुरुओं की विफलता मानी जायेगी। जो आपकी बात नहीं मानते उनको नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में क्यों आने देते हैं। मुस्लिम धर्मगुरु शांति व्यवस्था की बहाली के लिए प्रशासन का सहयोग करें। हमारी कड़ी निगाह शुक्रवार पर है, उसके बाद हम कोई फैसला करेंगे।

विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाक्‍टर राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दू धर्माचार्यों की अपील पर मुस्लिम धर्मगुरु जरूर विचार करें। शुक्रवार की नमाज को शांति का पैगाम देने वाला बनायें।

चन्द्रभूषण दास महाराज ने कहा कि मस्जिदों और मौलवियों पर कड़ी निगरानी प्रशासन रखें। जो भड़काने का प्रयास करे, उसके खाते की जांच हों ताकि बाहरी फंडिंग की जानकारी मिल सके।

बैठक के बाद पत्रक देने वालों में महंत बालक दास, महंत महाबीर दास, रघुनाथ दास, राघव दास, कोतवाल विजय राम दास, चन्द्रभूषण दास, डा० राजीव श्रीगुरूजी, अफसर बाबा, नजमा परवीन, मोहम्‍मद अजहरूद्दीन, धनंजय यादव शामिल रहे।

काशी धर्म परिषद के धर्माधिकारियों की अपील

1. मुस्लिम धर्मगुरु ध्यान दें ‘जुमे के नमाज के दिन मुस्लिम समाज के नमाजियों को किसी तरह कोई भड़काऊ तकरीर न दें’।

2. दुकानों पर तोड़–फोड़ करने, पत्थर चलाने और हिंसक होने से इस्लाम बदनाम होगा। ऐसा काम न करें, जिससे मुसलमानों के नमाज पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाए। जिस मस्जिद से नमाजी निकलकर पत्थरबाजी करते हो उस मस्जिद के मौलाना और मुतवल्ली पर कानूनी कार्यवायी होनी चाहिए।

3. शांति के लिये जरूरी है सभी लोग सभी धर्मों का सम्मान करें।

4. मुस्लिम समुदाय के लोग नफरत फैलाने वाले, हिंसा फैलाने वालों का साथ न दें और न ही हिंसा करने वाले व्यक्तियों का समर्थन करें।

5. प्रशासन से अपील है कि बाहर से आए हुए मौलानाओं पर नजर रखें और हर कीमत पर बनारस में शांति व्यवस्था बहाल करें।

6. पीएफआइ व अन्य हिंसक संगठन जो धर्म के नाम पर हिंसा फैलाते हैं, मुस्लिम धर्मगुरु उस पर भी पैनी नजर रखें और मुस्लिम नौजवानों को उनसे जुड़ने से रोकें।

7. शुक्रवार को जुमे की नमाज के समय भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी मुस्लिम समाज के धर्मगुरु एवं मस्जिदों के कार्यकर्ता स्वयं लें।

8. काशी से सभी धर्मों के लोग मिलकर शांति और एकता का संदेश पूरी दुनिया को भेजें।

9. मस्जिदों से ऐसी तकरीर न करें जिससे दूसरे धर्म की भावनाएं भड़के और नमाजी कानून को अपने हाथ में लें।

10. हिंसा से किसी समस्या का हल नहीं होगा बल्कि दोनों धर्मों के बीच कड़वाहट बढ़ेगी।

11. मुस्लिम धर्मगुरूओं की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि अपने समाज को शांति, अहिंसा और कानून के रास्ते पर ले जाएं।

12. मुस्लिम धर्मगुरु अपने पैगम्बर मोहम्मद साहब के उपदेशों का ख्याल रखें और उनके द्वारा बताए गए शांति के रास्ते पर चलें।

13. मुसलमानों को भड़काने वाले ऐसे धर्मगुरुओं की पहचान करें जो हिंसा भड़काकर मुसलमानों को गलत रास्ते पर ले जाते हैं।

14. मुस्लिम धर्मगुरु अपने मुहल्लों में बाहर से आए लोगों की पहचान करें क्योंकि जब मस्जिद से नमाजी निकलकर पथराव करते हैं तो यह कहा जाता है कि ये बाहरी लोग थे।

15. मुस्लिम धर्मगुरु मस्जिद में नमाजियों की सूची बनाएं और परिचय पत्र जारी करें।

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