अब तुर्की नहीं 'तुर्किये' कहिए जनाब, श्रीलंका और ईरान भी हैं बदले हुए नाम; जानिए- नाम बदले के पीछे की वजह

 

विभिन्न देशों द्वारा नाम बदलने की प्रक्रिया में गुलामी या थोपे गए नाम की मानसिकता से मुक्त होने की कोशिश

कुछ देशों द्वारा नाम बदलने की प्रक्रिया में गुलामी या थोपे गए नाम की मानसिकता से मुक्त होने की कोशिश झलकती है। कोई भी स्वतंत्र देश गुलामी के पदचिह्नों पर चलना तथा थोपे गए प्रतीकों का भार सहन करना नहीं चाहेगा। अत नाम बदलने का चलन वांछनीय है।

नई दिल्‍ली। संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी मिलने के बाद अब तुर्की को तुर्किये के नाम से जाना जाएगा। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एदरेगन की सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नाम तुर्की को तुर्किये (तूर-की-याय) में बदलने के लिए काफी अर्से से प्रयास कर रही थी, क्योंकि यह शब्द तुर्की भाषा की वर्तनी और उच्चारण के साथ सभ्यता और संस्कृति के लिहाज से उचित है। 1923 में तुर्की की स्वतंत्रता की घोषणा के बाद से ही वहां के निवासी इसे तुर्किये उच्चारित करते रहे हैं। तुर्की का जो अभी नाम है, उसके कई मतलब होते हैं। हालांकि, इसके ये अर्थ थोड़े नकारात्मक हैं। तुर्की यानी इंग्लिश में इसका उच्चारण टर्की होता है, जिसका अर्थ बेवकूफ व्यक्ति होता है। इसे नाकामी से भी जोड़ा जाता है। वहीं टर्की नाम का एक पक्षी भी होता है। भारत में इसे तीतर के नाम से जानते हैं। इसलिए टर्की अपने इस नाम को बदलकर अपनी भाषा के हिसाब से अपने देश का नाम रखना चाह रहा था।


उल्लेखनीय है कि तुर्की की सरकार ने पिछली सरकार से ही अपने देश का नाम तुर्की लिखना बंद कर दिया था। एदरेगन ने आदेश दिया था कि अब से तुर्की की जगह तुर्किये लिखा जाए। इसके बाद से ही तुर्की से निर्यात होने वाले सामानों पर भी मेड इन तुर्किये लिखा जाने लगा था। नाम बदलने वाले देशों की फेहरिस्त में तुर्की पहला देश नहीं है। इससे पहले भी कई देशों ने अपने नाम बदले हैं।

कभी नीदरलैंड को हालैंड कहा जाता था, लेकिन जनवरी 2020 में हालैंड नाम को हटाकर डच सरकार ने अपनी छवि में सुधार किया। क्योंकि हालैंड को ज्यादातर नशीली दवाओं और जिस्‍मफरोशी से जोड़ा जाता था, जिस कारण लोग वहां जाना पसंद नहीं करते थे। इसी तरह 2019 में राजनीतिक वजह से रिपब्लिक आफ मेसिडोनिया आधिकारिक तौर पर उत्तर मेसिडोनिया रिपब्लिक बन गया। 2018 में राजा मस्वाती तृतीय ने देश के अतीत से मुक्त होने के लिए स्वाजीलैंड का नाम बदलकर इस्वातिनी कर दिया।

यूरोपीय देश चेक रिपब्लिक को 2016 में बदलकर चेकिया कर दिया गया। इसी तरह 1972 में श्रीलंका ने कोलोनियल संघों से अलग होने के लिए अपना नाम सीलोन बदल दिया था। 1935 में ईरान ने अपना नाम फारस से बदल लिया था। फारसी में ईरान का अर्थ पर्शियन है। 1989 में बर्मा का नाम बदलकर म्यांमार कर दिया गया।

असल में विभिन्न देशों द्वारा नाम बदलने की प्रक्रिया में गुलामी या थोपे गए नाम की मानसिकता से मुक्त होने की कोशिश झलकती है। इसका भावनात्मक और विचारात्मक प्रभाव रहता है। कोई भी स्वतंत्र देश गुलामी के पदचिह्नों पर चलना तथा थोपे गए प्रतीकों का भार सहन करना नहीं चाहेगा। अत: नाम बदलने का चलन वांछनीय है। नाम का बदलाव किसी भी देश के गौरवशाली इतिहास के प्रति सजग दृष्टि का ही प्रमाण है।